छात्रवृत्ति और शुल्क की भरपाई की बाट जोह रहे विद्यार्थियों के लिए हकीकत निराश करने वाली है। आवेदन करने वाले पिछड़े वर्ग के दो-तिहाई और सामान्य वर्ग के आधे छात्रों को यह सहूलियत नहीं मिल पाएगी। मांग और उपलब्ध बजट के आधार पर समाज कल्याण और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अधिकारी इस नतीजे पर पहुंचे हैं।
इस बारे में गहन विचार-विमर्श के लिए बुधवार को मुख्य सचिव ने अपने कार्यालय में अफसरों की बैठक बुलाई है। दशमोत्तर कक्षाओं (पोस्ट मैट्रिक) के उन विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और शुल्क की प्रतिपूर्ति करने का प्रावधान है, जिनके अभिभावकों की सालाना आमदनी दो लाख रुपये तक है।
सत्र 2014-15 में अनुसूचित जाति व जनजाति, पिछड़े और सामान्य वर्ग के करीब 61 लाख विद्यार्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किया है। अनुसूचित जाति और जनजाति के सभी छात्रों को वजीफा और शुल्क की भरपाई केंद्र सरकार करती है।
अनुसूचित जाति के लिए सालाना राज्य का अंश 661.30 करोड़ रुपये तय है। यानी इन दोनों वर्गों के सभी छात्रों को इस योजना का लाभ मिल जाएगा। दिक्कत पिछड़े और सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए है।
सामान्य वर्ग के करीब 12 लाख छात्र दशमोत्तर कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे हैं। इनके लिए 1560 करोड़ रुपये की जरूरत है, जबकि समाज कल्याण विभाग को इस मद में महज 700 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
आवेदन करने वाले कुछ हजार छात्र एनआईसी की स्क्रूटनी (जांच) में अयोग्य भी ठहराए जाएंगे। इसलिए विभागीय अफसरों का कहना है कि उपलब्ध राशि से ज्यादा से ज्यादा छह लाख छात्रों को ही छात्रवृत्ति और शुल्क की भरपाई की जा सकेगी।