यूपी के सहारनपुर और बागपत से गुजर रही कृष्णा नदी का पानी कहीं कैंसर तो नहीं फैला रहा? सहारनपुर में हिंडन का पानी काला हो चुका है तो कृष्णा का पानी भी प्रदूषित है। विधान परिषद में मामला उठने के बाद हरकत में आई अखिलेश सरकार ने लखनऊ से डॉक्टरों की टीम भेजी तो चौंकाने वाली जानकारियां मिलीं।
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जांच टीम को अधिकतर गांवों में कैंसर के रोगी मिले तो कई लोगों में त्वचा रोग है। डॉक्टरों की टीम को अंदेशा है कि नदी का गंदा पानी ही गांव में बीमारी की जड़ है। डॉक्टरों ने स्वास्थ्य महानिदेशालय को जांच रिपोर्ट सौंप दी है।
कृष्णा व हिंडन का प्रदूषित पानी बागपत, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर के गांवों में फैल रहे कैंसर का प्रमुख कारण हो सकता है। बलरामपुर अस्पताल के डॉक्टरों की टीम नवंबर में स्वास्थ्य निदेशालय के आदेश पर सहारनपुर के गांवों का दौरा करने गई थी।
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टीम में शामिल डॉ. सुनील कुमार और डॉ. आरके गुप्ता ने जांच के बाद निदेशालय को रिपोर्ट दे दी है। यह टीम पानी का सैंपल भी लखनऊ ले आई है। अभी इसकी रिपोर्ट नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पानी में यदि प्रदूषित कण मिले तो बड़े पैमाने पर वहां काम करना होगा।
कैंसर से हो रही है मौत, नहीं है रिकॉर्ड
कृष्णा नदी के किनारे बसे गांव कचरायी, भांजपुर, भनिंडा खेमचंद की कुल आबादी करीब चार हजार है। पता चला कि इन गांवों में कोई कैंसर रोगी नहीं है। ग्राम प्रधान की मानें तो पिछले पांच सालों में कई लोगों की मौत कैंसर और त्वचा रोग से हो चुकी है।
लेकिन इन मौतों का कोई कागजी रिकॉर्ड न होने के कारण कुछ स्पष्ट नहीं है। हिंडन किनारे बसे गांव महेशपुर में कैंसर के चार मरीज मिले। किसी महिला के शरीर में गांठ थी तो कोई ब्रेस्ट कैंसर और यूटेरस के कैंसर से पीड़ित है।
इन सभी का पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज चल रहा है। सिमलाना गांव की आबादी करीब 4,280 है और यहां कैंसर के चार मरीज हैं। चिरायु गांव की आबादी 1625 हैं। यहां के चार मरीजों का इलाज पीजीआई चंडीगढ़ में हो रहा है।
सहारनपुर के गांव में दस की मौत जांच रिपोर्ट में मौत के आंकड़ों को लेकर एकराय नहीं है। सहारनपुर के ननखेड़ा खुर्द गांव में कैंसर के छह मरीज मिले जबकि दस मौतों की जानकारी मिली। इनमें से पांच की मौत कैंसर और पांच की मौत एलर्जी से हुई थी। चिरायु गांव में पांच मरीज मिले हैं।
आठ लोगों की मौत 2013 से 2014 तक हो चुकी है। महेशपुर गांव में चार रोगी मिले जबकि 2009 से 2014 के बीच 19 लोगों की मौत हो चुकी है। मौतों का कारण क्या रहा, कागज न मिलने के कारण पुष्टि नहीं हो सकी। शिमलाना गांव में चार कैंसर रोगियों का इलाज चल रहा है जबकि 20 लोगों की मौत की सूचना ग्रामीणों और ग्राम प्रधान से मिली है।
बागपत में भी मिले कैंसर रोगी
स्वास्थ्य विभाग के आदेश पर बागपत पहुंची सिविल अस्पताल के डॉक्टरों की टीम बुखार व खांसी के मरीजों की संख्या को लेकर चिंतित थी। अस्पताल से डॉ. अभिषेक पांडे और डॉ. नीरज शेखर को सर्वे के लिए भेजा गया था।
अस्पताल प्रशासन और निदेशालय को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक गांगगनौली, निरपुड़ा, बरनावा में इक्का-दुक्का कैंसर रोगी मिले। हिम्मतपुर, रहताना, मिलाना, झुंडपुर में कैंसर का कोई मरीज नहीं मिला।
सहारनपुर और बागपत गई टीम की मानें तो एक ही नदी के तीन नाम हैं। आगे चलकर यह हिंडन के नाम से जानी जाती है। इसके किनारे स्थित गांव में मरीज अधिक मिले। डॉक्टरों का मानना है कि हिंडन का पानी बहुत काला और बदबूदार है।
चिकित्सकों को आशंका है कि नदी के पानी का स्रोत लोगों का स्वास्थ्य बिगाड़ रहा है। इसी तरह बागपत से गुजरने वाली कृष्णा नदी को काली नदी कहा जाता है। हिंडन और कृष्णा कई जगहों पर आपस में मिलती हैं और उसके गंदे पानी की वजह से गांव वालों ने इसका नाम काली नदी रख दिया।
विशेषज्ञों की मानें तो गांवों में कैंसर या त्वचा रोग फैलने का कारण जानने के लिए स्क्रीनिंग की जरूरत है। नदी के पानी की इसमें क्या भूमिका है, इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जांच करनी होगी। कैंसर विशेषज्ञ लोगों की जांच करेंगे तो स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। रिपोर्ट सौंप दी गई है। आगे सरकार और स्वास्थ्य विभाग को निर्णय लेना है।
सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव ने बताया कि स्वास्थ्य महानिदेशालय के आदेश पर डॉक्टरों की टीम को सहारनपुर, बागपत और मुजफ्फरनगर भेजा गया था। ग्रामीण इलाकों से जांच कर लौटी टीम ने अपनी रिपोर्ट निदेशालय को सौंप दी है। रिपोर्ट में क्या है इसकी जानकारी मुझे नहीं है। लोहिया अस्पताल की टीम नहीं गई, इस बारे में जवाब तलब किया जाएगा।