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Lucknow News: युवती के घर पसरा सन्नाटा, बैकफुट पर पुलिस

Fri, 13 Dec 2024 12:40 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
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रायबरेली। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के एक्स हैंडल पर पोस्ट से पुलिस अधीक्षक दफ्तर में हंगामा करने वाली युवती के साथ अमानवीय व्यवहार और जेल भेजने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। यही वजह रही कि पुलिस बृहस्पतिवार को इस प्रकरण को लेकर बैकफुट पर नजर आई। पुलिस ने अपनी साख बचाने के लिए न सिर्फ मोहल्ले में जाकर युवती के बारे में जानकारी जुटाई, बल्कि परिजनों व पड़ोसियों से भी बातचीत की। हालांकि, युवती के घर पर सन्नाटा पसरा था।
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बस्तेपुर की रहने वाली रचना मौर्य के साथ एसपी दफ्तर में बुधवार को जिस तरह हुआ, उससे हर कोई हैरान है। लोगों का यही कहना है कि पुलिस युवती का धारा-151 में चालान भी कर सकती थी। इतना बड़ा मामला नहीं था कि थाना प्रभारी किरण भास्कर की तहरीर पर केस दर्ज करके उसे जेल भेजा जाता।

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सुबह अमर उजाला में छपी खबर व फोटो को एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए प्रदेश सरकार को घेरा। मामला तूल पकड़ते देख पुलिस अपने को बचाने में जुट गई। आननफानन पुलिस टीम युवती के घर बस्तेपुर पहुंच गई। घर पर सन्नाटा पसरा था। ऐसे में पुलिस ने पड़ोसियों व अन्य परिजनों से युवती के बारे में पूछताछ की।
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बस्तेपुर में रहने वाले अमृतलाल मौर्य ने पुलिस को बताया कि रचना में उनकी भतीजी लगती है। वह मानसिक रूप से बीमार है। आए दिन लोगों को परेशान करती है। अपने भाइयों व बहनों से भी विवाद करती है। आए दिन डॉयल-112 पुलिस बुलाकर लोगों को परेशान करती है। पुलिस भी युवती से परेशान है।

एसपी को पत्र देकर हम लोगों ने मांग भी की थी कि रचना का मेंटल अस्पताल में दाखिला करा दिया जाए। पड़ोसी संतोष कुमार ने बताया कि युवती आए दिन लोगों से विवाद करती है। मोहल्ले के लोग उससे परेशान हैं। पुलिस भले ही इस प्रकरण में अपने को बेदाग साबित करने में जुटी हो, लेकिन युवती को जेल भेजने के बाद सवालों के घेरे में है।


पैर मारने का आरोप निराधार: एसपी
पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि रचना मौर्य अपने पारिवारिक निजी बंटवारे को लेकर कार्यालय आई थी। इस दौरान वह लोगों से अभद्र व्यवहार करने लगी। सीओ सदर ने मौके पर युवती को समझाने का प्रयास किया था, लेकिन उनसे भी अभद्र व्यवहार किया। महिला थाना प्रभारी के साथ धक्कामुक्की की।

इस पर महिला थाना प्रभारी ने बल का प्रयोग करते हुए युवती को हिरासत में लेकर कोतवाली में केस दर्ज कराकर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया। उन्होंने छह दिवस के न्यायिक रिमांड पर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। महिला थाना प्रभारी के पैर मारने का आरोप असत्य व निराधार है। रचना स्वयं ही जमीन पर गिरकर लोटने लगी थी। रचना उग्र व्यवहार की महिला है। आए दिन आसपास के लोगों एवं परिवार के साथ झगड़ा करती रहती है।
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