जितना यूजर चार्ज मिल रहा उससे तीन गुना से ज्यादा दी जा रही कंपनी को टिपिंग फीस, शहर फिर भी गंदा
कचरा प्रबंधन योजना के नाम पर नगर निगम को बड़ी चपत लग रही है। पिछले साल नौ महीने (अप्रैल से दिसंबर तक) तक निजी कंपनी ईकोग्रीन ने 4.67 करोड़ रुपये रुपये यूजर चार्ज वसूल किया, जबकि निगम को उसे टिपिंग फीस के एवज में 18 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ा।
ऐसे में नगर निगम पर कचरा प्रबंधन योजना बोझ बन गई है। कंपनी करीब 2.70 लाख घरों से कूड़ा उठाने का दावा कर रही है, लेकिन पूरा यूजर चार्ज जमा नहीं हो रहा है।
कंपनी का कहना है कि एक लाख से अधिक लोग यूजर चार्ज ही नहीं देते, जिसे निगम प्रशासन स्वीकार भी कर रहा है। शहर साफ रहे और खुले में कचरा न डाला जाए।
इसके लिए घरों से ही कचरा लेने की योजना बनी। इसके तहत निजी कंपनी को अनुबंध में सहूलियत दी गई कि यदि तीन साल तक सभी घरों से यूजर चार्ज नहीं मिला तो भी निगम प्रशासन कंपनी को पूरी टिपिंग फीस देगा।
इसका फायदा पहले ज्योति इनवायरोटेक ने पांच साल तक उठाया और नई कंपनी ईकोग्रीन भी इसी राह पर चल रही है।
कंपनी जितने घरों से कूड़ा लेने का दावा कर टिपिंग फीस का बिल नगर निगम को भेजती है, उतने घरों से यूजर चार्ज वसूल कर जमा नहीं कर रही है।
ऐसे में आधा काम कागज पर ही हो रहा है और टिपिंग फीस का बिल पूरा भेजा जा रहा है। आम लोगों संग पार्षद भी लगातार इसकी शिकायत करते रहते हैं कि ईकोग्रीन सही से डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन नहीं कर रही है। इस पर चेतावनी भी जारी की गई, लेकिन उसका कोई खास असर नहीं पड़ा।
13.23 करोड़ निगम ने अपने पास से दिए
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार बीते साल अप्रैल से दिसंबर तक ईकोग्रीन एनर्जी कंपनी ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के बदले नगर निगम में 4.67 करोड़ रुपये का यूजर चार्ज जमा किया। वहीं, इसी अवधि में टिपिंग फीस के एवज में निगम ने कंपनी को 18 करोड़ रुपये का भुगतान किया। ऐसे में 13.23 करोड़ रुपये नगर निगम को अपने पास से देने पड़े।
एक लाख से अधिक नहीं दे रहे यूजर चार्ज
नगर निगम के पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण का कहना है कि कंपनी का दावा है कि वह 2.70 लाख घराें व दुकानों से कूड़ा जमा कर रही है। हालांकि, इसमें से एक करीब 1.10 लाख लोग यूजर चार्ज नहीं देते हैं। कंपनी इस समय टिपिंग फीस का एक माह का बिल 2 से 2.50 करोड़ दे रही है। अनुबंध के तहत टिपिंग फीस घर व दुकानों से कूड़ा उठाकर शिवरी प्लांट ले जाकर उसका निस्तारण करने को दी जाती है। इस महीने कंपनी क ी यूजर चार्ज वसूली करीब 75 लाख है।
यूजर चार्ज की जांच का कोई सिस्टम नहीं
कंपनी कितने घरों से यूजर चार्ज वसूल रही है, कितने घरों से कूड़ा ले रही है और कितना कूड़ा प्लांट ले जाकर निस्तारित कर रही है, यह जांचने का कोई पुख्ता सिस्टम नहीं है। कंपनी जो बताती है उसी पर अफसर विश्वास कर रहे हैं। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम प्रशासन ने तीन महीने वार्डों में जांच कराई थी तो तमाम शिकायतें सामने आई थीं। इसमें लोगों ने बताया था कि कंपनी के कर्मचारी कूड़ा लेने ही नहीं आते।
कंपनी को बढ़ानी होगी वसूली
पर्यावरण अभियंता व प्रभारी कचरा प्रबंधन, पंकज भूषण ने बताया कि कंपनी को लगातार काम में सुधार के निर्देश दिए जा रहे हैं। कई नोटिस भी जारी किए गए। कंपनी जो बिल टिपिंग फीस का देती है उसका परीक्षण करने के बाद ही भुगतान होता है। ईकोग्रीन को मार्च 2017 में काम दिया गया था। अब दो साल से अधिक हो गए हैं। तीन साल बाद कंपनी को यूजर चार्ज वसूली बढ़ानी होगी। उसी हिसाब से उसे टिपिंग फीस दी जाएगी।
बाहरी लोग भी उठा रहे कूड़ा
प्रबंधक ,ईकोग्रीन कंपनी, अभिषेक सिंह ने बताया कि पूरे शहर में सिर्फ ईकोग्रीन ही काम करे तो यूजर चार्र्ज की वसूली बढ़ जाए, लेकिन यहां बाहरी लोग भी कूड़ा उठा रहे हैं। कई बार कहने पर भी यह व्यवस्था बंद नहीं हो रही है। इस समय करीब 80 लाख से एक करोड़ तक यूजर चार्ज की वसूली है और टिपिंग फीस करीब ढाई करोड़ तक बनती है। यूजर चार्ज की वसूली बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। करीब एक लाख लोग यूजर चार्ज नहीं देते हैं। इसकी रिपोर्ट नगर निगम को दी जाती है।