लखनऊ। सरकारी संस्थानों में दिव्यांगों को कृत्रिम अंग न मिलने में कर्मियों की कमी बड़ी समस्या बन रही है। अंतरराष्ट्रीय प्रोस्थेटिक्स और आर्थोटिक्स दिवस के अवसर पर बुधवार को इंदिरानगर में आर्थोटिक्स प्रोस्थेटिक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित कार्यक्रम में यह मुद्दा उठाया गया।
केजीएमयू के लिंब सेंटर के पूर्व कार्यशाला प्रबंधक और प्रभारी अरविंद कुमार निगम ने बताया कि लिंब सेंटर में प्रोस्थेटिस्ट और ऑर्थोटिस्ट विशेषज्ञों के आठ पद 10 वर्षों से खाली पड़े हैं। वर्तमान में केवल एक विशेषज्ञ के भरोसे पूरी कार्यशाला का संचालन हो रहा है।
इसी प्रकार, डॉ. शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय में भी प्रोस्थेटिक्स और आर्थोटिक्स शिक्षकों के आठ पद रिक्त हैं और शिक्षण कार्य संविदा शिक्षकों के माध्यम से चलाया जा रहा है। यहां भी मात्र एक कार्यशाला प्रबंधक और एक ऑर्थोटिस्ट के सहारे ही पूरा विभाग संचालित हो रहा है। लोहिया संस्थान में भी एक प्रोस्थेटिस्ट के भरोसे पूरा विभाग चल रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अजीत प्रताप सिंह ने की। इस मौके पर राष्ट्रीय सचिव अजीत प्रताप सिंह, बीरेंद्र प्रसाद, आशीष सिंह, सत्यवान मिश्रा, राजेश मिश्रा, धर्मवीर सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।