लखनऊ। विश्व योग दिवस के उपलक्ष्य में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की ओर से ‘ज्ञान और अनुभव का संगम योग’ शीर्षक पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का मंगलवार को आयोजन किया गया। ओडिशी नृत्य शैली की गुरु पद्मविभूषण डॉ. सोनल मानसिंह ने वर्चुअल रूप से इसका शुभारंभ किया।
उन्होंने कहा कि नृत्य और योग के बीच गहरा संबंध है। योग के लिए गुरु का होना बहुत जरूरी है। वर्चुअल तरीके से जुड़े मानव चेतना एवं योग विज्ञान, देव संस्कृति विवि हरिद्वार के विभागाध्यक्ष डॉ. कामता प्रसाद साहू ने कहा कि आज की जीवन शैली ही जीवन की जटिलता बन गई है।
भातखंडे विवि की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कहा, योग के संदर्भ में संगीत कला के आचार्यों का चिंतन संभावनाओं को विकसित करेगा। दूसरे सत्र में ओडिसी नृत्यांगना पद्मश्री रंजना गौहर ने भगवान शिव के रूप में योग की व्याख्या की। पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य ने आहत से अनहद नाद तक के विराट स्वरूप की व्याख्या की। राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के सेवानिवृत्त प्रो. डॉ. प्रेम व स्कूल ऑफ इंडोलॉजिकल स्टडीज, इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट, मॉरिशस के विभागाध्यक्ष डॉ. केवल नायक ने भी बात रखी।