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Lucknow News: तीन वर्षीय बच्चे की अभिरक्षा के मामले में हाईकोर्ट सख्त, पिता को कोर्ट में पेश करने का आदेश

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लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने तीन वर्षीय बच्चे की कथित अवैध हिरासत से मुक्ति के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए बच्चे के पिता (प्रतिवादी) की लगातार अवहेलना पर सख्त नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश बच्चे की ओर से उसकी मां चांदनी शर्मा द्वारा दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया कि उनके पति गौतम शर्मा ने तीन वर्षीय पुत्र को जबरन उससे अलग कर लिया और तब से फरार हैं।कोर्ट ने महाराष्ट्र के डी जी पी को निर्देश दिया है कि वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 82 और 83 के अंतर्गत फरार प्रतिवादी के विरुद्ध प्रक्रिया शुरू करें।कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 1 अगस्त 2025 को नियत कर कहा है कि उस दिन प्रतिवादी के विरुद्ध आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश भी दिया जाएगा।
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याची का कहना था कि हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी करते हुए प्रतिवादी गौतम शर्मा बार-बार अदालत के समक्ष पेश नहीं हुआ और न ही बच्चे को प्रस्तुत किया। पहले जमानती और फिर गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद पुणे की पुलिस वारंट तामील नहीं करा सकी। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी और उसका पुत्र 26 मार्च 2025 से लापता हैं, जिसकी सूचना आरोपी की मां द्वारा चाकन (पुणे) थाने में दर्ज कराई गई थी।

कोर्ट ने पाया कि यह केवल अवैध हिरासत का मामला नहीं, बल्कि बच्चे की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। अदालत ने कहा कि प्रतिवादी लगातार अदालत के आदेशों और दिए गए आश्वासनों का उल्लंघन कर रहा है। कोर्ट ने लखनउ पीठ के सीनियर रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि इस आदेश के अनुपालन के लिए इसकी जानकारी महाराष्ट्र के डी जी पी समेत पुणे के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को दें।
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