लखनऊ। संगीत नाटक अकादमी का सभागार सोमवार को सुरों की गूंज से सराबोर रहा। आलाप, मींड और तानों ने ऐसा जादू बिखेरा कि श्रोता पलक झपकना भूल गए। ''पियरवा मोसे करत है रार...”, ''घर जाने दे छोड़ मोरी बैंया...'',''साजन घर आए...'' जैसे गीतों की मधुर प्रस्तुतियों ने शास्त्रीय संगीत की परंपरा में नई चमक भर दी।
आंग, बंदिशों और स्वर-साधना की बारीकियों ने दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई से रूबरू कराया। तराना वादन की बेमिसाल प्रस्तुतियों में जब कलाकारों ने द्रुत लय में “ता–ना–देरेना” जैसे स्वराक्षरों की लयकारी शुरू की तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। लय, गति और तकनीक का अद्भुत संतुलन देखने को मिला।
मौका था एसएनए में आयोजित प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिता के दूसरे चरण का, जहां सुरों की बयार बहाते हुए कई उभरते कलाकार सितारों की तरह चमकते दिखाई दिए। शहर सहित अन्य जिलों से आए कलाकारों ने ख्याल, तराना, ध्रुपद, धमार, ठुमरी और दादरा जैसी विधाओं में शानदार प्रदर्शन कर निर्णायकों को प्रभावित किया। कार्यक्रम में अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह, निदेशक डॉ. शोभित कुमार नाहर, खंडवा के रोमिल जैन, ग्रेटर नोएडा की नबनिता चौधरी और दिल्ली के पंडित राधा गोविंद दास उपस्थित रहे। निर्णायकों ने प्रतिभागियों की साधना और प्रस्तुति की खुलकर सराहना की। रेनू श्रीवास्तव और डॉ. पवन तिवारी के संयोजन में आयोजित इस प्रतियोगिता का मंच संचालन राजेंद्र विश्वकर्मा ने किया।
इन विधाओं में चमके ये सितारे
ख्याल तराना- अथर्व मिश्र प्रथम (लखनऊ) और नैंसी दीप द्वितीय (आगरा)
ठुमरी दादरा- शौर्याश्री (गाजियाबाद) और ऋत्विका द्वितीय (मिर्जापुर)
ध्रुपद धमार- अक्षत सिंह (अयोध्या) और आन्या सिंह द्वितीय (बांदा)
प्रतियोगिता के प्रतिभागियों के साथ अकादमी के अध्यक्ष जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह, निदेशक शोभि
प्रतियोगिता के प्रतिभागियों के साथ अकादमी के अध्यक्ष जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह, निदेशक शोभि
प्रतियोगिता के प्रतिभागियों के साथ अकादमी के अध्यक्ष जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह, निदेशक शोभि
प्रतियोगिता के प्रतिभागियों के साथ अकादमी के अध्यक्ष जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह, निदेशक शोभि
प्रतियोगिता के प्रतिभागियों के साथ अकादमी के अध्यक्ष जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह, निदेशक शोभि