लखनऊ। जिस कॉम्प्लेक्स के निर्माण की शिकायत पर एलडीए के जेई और सुपरवाइजर को साढ़े सात लाख रुपये घूस लेते पकड़ा गया था, उसके मालिक ने बृहस्पतिवार को एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार से मुलाकात की। उन्होंने कॉम्प्लेक्स का शमन मानचित्र पास कराने के लिए आवेदन भी किया। मुलाकात के दौरान विजिलेंस की टीम मौजूद रही। शिकायतकर्ता ने वीसी को भवन निर्माण से जुड़ी जानकारी दी, जबकि विजिलेंस टीम ने एलडीए अधिकारियों से मामले से संबंधित जानकारी ली।
विजिलेंस टीम ने आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने के लिए शिकायतकर्ता के भवन मानचित्र से जुड़ी फाइल अपने कब्जे में ले ली। टीम के निर्देश पर एलडीए के संबंधित पटल से नक्शे के मूल दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड निकाले गए। शिकायतकर्ता की मौजूदगी में टीम ने दस्तावेज की जांच की और कई अहम पन्नों की प्रतियां अपने साथ ले गई।
एलडीए उपाध्यक्ष ने विजिलेंस जांच में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि मामले से जुड़ी कोई भी फाइल या साक्ष्य टीम मांगे तो उसे तत्काल उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फाइलों की जांच के बाद एलडीए के उन अधिकारियों और कर्मचारियों में भी हड़कंप है, जिनकी भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
वीसी ने बताया कि निलंबित जेई दिनेश वर्मा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। शिकायतकर्ता ने बताया कि कॉम्प्लेक्स का निर्माण बिना स्वीकृत मानचित्र के किया जा रहा था। अब उसने शमन मानचित्र पास कराने के लिए आवेदन किया है।
तीन सप्ताह में 51 इमारतों का सर्वे करेगी सुप्रीम कोर्ट की टीम
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विशेष टीम तीन सप्ताह के भीतर अलीगंज क्षेत्र में चिह्नित 51 अवैध इमारतों का सर्वे करेगी। इन इमारतों को एलडीए ने अलीगंज अग्निकांड के बाद चिह्नित किया है। सुप्रीम कोर्ट में लोकनाथन बनाम तमिलनाडु सरकार मामले की चार और पांच अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान अलीगंज अग्निकांड का मामला भी उठा था। हादसे में 15 लोगों की मौत हुई थी। कोर्ट ने अवैध और असुरक्षित इमारतों को लेकर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद एलडीए ने बुधवार को अलीगंज में 51 ऐसी इमारतें चिह्नित कीं, जिन्हें अवैध और खतरनाक बताया गया है। अब इनके खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होनी है। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की टीम तीन सप्ताह में सर्वे कर अंतिम रूप से कार्रवाई योग्य इमारतों को चिह्नित करेगी।