लखनऊ। कंस की कहानी को सत्ता, भय, अहंकार और मानवीय संवेदनाओं के नए नजरिये से सामने लाने वाली नाट्य प्रस्तुति कथा एक कंस की ने दर्शकों को पारंपरिक कथा से आगे सोचने का अवसर दिया। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से संस्था भारत रंग की ओर से चारबाग स्थित रविंद्रालय प्रेक्षागृह में दया प्रकाश सिन्हा लिखित, चन्द्रभाष सिंह निर्देशित नाटक की प्रस्तुति हुई।
नाटक में कंस को केवल अत्याचारी और क्रूर शासक के रूप में नहीं, बल्कि परिस्थितियों और सत्ता की लालसा के बीच बदलते एक संवेदनशील मनुष्य के रूप में उभारा गया। उसके जीवन के वो पहलु सामने आए, जो सामान्य तौर पर कृष्ण-कथा में पीछे छूट जाते हैं। बचपन में कला और संगीत प्रेमी कंस धीरे-धीरे राजनीतिक चाह स्वार्थ और सत्ता के दबाव में कठोर होता जाता है।
सत्ता हासिल करने के बाद उसके भीतर का भय और असुरक्षा और गहरी होती जाती है। यही भय उसे अपने परिवार और प्रियजनों से दूर कर देता है। प्रेम और विश्वास की जगह संदेह ले लेता है। नाटक में गिन्नी सहगल ने स्वाति, मुस्कान सोनी ने अस्ति, अनामिका ने देवकी और कंस की भूमिका में चन्द्रभाष सिंह समेत अन्य कलाकारों ने पात्रों को जीवंत किया। नाटक ने दर्शकों के सामने यह सवाल छोड़ दिया कि मनुष्य जन्म से कंस होता है या परिस्थितियां उसे कंस बना देती हैं? इस दौरान मुख्य अतिथि उप महानिदेशक (अभि.) दूरदर्शन कमलेश कुमार गुप्ता, पूर्व पुलिस उप महानिरीक्षक एमआर सिंह, संस्था सचिव जूही कुमारी समेत बड़ी संख्या में दर्शक मौजूूद रहे।
नाटक का मंचन करते कलाकार
नाटक का मंचन करते कलाकार
नाटक का मंचन करते कलाकार
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