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Lucknow News: शहर में सफाई की निगरानी का सिस्टम फिर फेल, नहीं लगेगा आरएफआईडी सिस्टम

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लखनऊ। सफाई में सुधार को लेकर निगरानी का सिस्टम फिर फेल हो गया है। ऐसे में करोड़ों खर्च होने के बाद भी जहां सफाई में सुधार नहीं है, वहीं एक बार फिर निजी कंपनी रामकी (लखनऊ स्वच्छता अभियान) और नगर निगम के बीच विवाद शुरू हो गया है। ऐसे में एक बार फिर शहर की सफाई व्यवस्था पचड़े में फंस सकती है।
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निजी कंपनी घरों से कूड़ा लेने का काम सही से कर रही है कि नहीं, इसकी निगरानी के लिए कंपनी को हर घर के बाहर आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटीफिकेशन) प्लेट लगानी थी। इसका लाभ ये होता कि जब कंपनी की गाड़ी घरों से कूड़ा लेने जाती तो वहां लगी आरएफआईडी प्लेट को कर्मचारी रीडर मशीन से स्कैन करता और इससे कंट्रोल रूम में यह सूचना अपने आप चली जाती कि किस-किस घर से कूड़ा कलेक्शन कर लिया गया है। इस तकनीकी सिस्टम के लगने के बाद कंपनी कूड़ा कलेक्शन में घालमेल नहीं कर सकती थी, लेकिन कंपनी ने सुधार की यह कोशिश फेल कर दी है।
एक साल से अधिक समय से कंपनी शहर में कूड़ा कलेक्शन का काम कर रही है, मगर उसने अब तक आरएफआईडी प्लेट नहीं लगाई है, जबकि कंपनी और नगर निगम के बीच हुए अनुबंध में इसे लगाने का प्रावधान किया गया था। यह मामला नगर निगम सदन में भी बीते सप्ताह उठा था। अब एक साल बाद कंपनी यह कह रही है कि वह घरों में आएफआईडी प्लेट नहीं लगाएगी। उसके लिए अधिक कर्मचारी लगाने पड़ेंगे और बजट भी अधिक खर्च होगा। ऐसे में आरएफआईडी प्लेट के जरिये नगर निगम ने सफाई में सुधार के लिए जो कदम उठाने का सोचा था, वह फेल हो गया।
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सुधार के नाम पर बार-बार बदली जा रही व्यवस्था
सफाई कर्मचारियोंं की तैनाती में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए करीब 10 साल पहले नगर निगम में हैंडहेल्ड मशीनें खरीदी गईं। यह बंद हुई तो करीब छह साल पहले स्मार्ट वॉच लाई गई। यह भी फेल हो गई तो करीब चार साल पहले स्मार्ट मोबाइल सिस्टम लाया गया, मगर यह भी फेल हो गया। फिर बीते साल आरएफआईडी सिस्टम को लगाने का प्रस्ताव पास किया गया और अब यह भी दम तोड़ गया। ऐसे में सफाई पर निगरानी का सिस्टम फिर फेल हो गया है।
कंपनी अब यह दे रही तर्क
शहर के 77 वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का काम करने वाली निजी कंपनी के प्रोजेक्ट हेड अभय रंजन का कहना है कि आरएफआईडी हर घर पर लगाना संभव नहीं है। पांच जोन में करीब पांच लाख घर हैं तो पांच लाख आरएफआईडी प्लेट लगानी होगी। फिर इसे स्कैन करने के लिए कर्मचारी अलग से लगाने पड़ेंगे, यह व्यावहारिक नहीं है। आरएफआडी प्लेट घरों के बजाय पीसीटीएस पर कूड़ा लेकर आने वाली गाड़ियों पर लगाया जाएगा। यह वहां पर तब लगेंगे, जब नगर निगम पीसीटीएस बनाकर देगा।
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कंपनी के साथ जो अनुबंध हुआ है उसका उसे पालन करना होगा। इसको लेकर उसे नोटिस जारी किया गया है।

इंद्रजीत सिंह, नगर आयुक्त
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