दूतवाक्यम् के जरिये मंच पर उतरी महाभारत की कथा
- फोटो : करंट लगने से किसान की मौत के बाद रोते बिलखते परिजन।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान और सफर फाउंडेशन की ओर से गोमतीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध में संस्कृत नाटक दूतवाक्यम् का मंचन किया गया। नाटक में महाभारत काल के उस हिस्से का वर्णन है जब पांडव 12 वर्ष का वनवास और फिर अज्ञातवास बिताकर इंद्रप्रस्थ लौटकर आते हैं। पांडवों ने जब कौरवों से प्रतिज्ञा के अनुसार आधा राज्य मांगा तो उसने इन्कार कर दिया। इसके बाद पांडवों की ओर से भगवान श्रीकृष्ण दूत बनकर हस्तिनापुर जाते हैं।
महाकवि भास रचित इस नाटक में दिखाया जाता है कि दुर्योधन की सभा में जब श्रीकृष्ण पांडवों का प्रस्ताव लेकर जाते हैं तो दुर्योधन उन्हें बंदी बनाने का प्रयास करता है। इस पर श्रीकृष्ण इतना क्रोधित हो जाते हैं कि वे सुदर्शन चक्र उठा लेते हैं। तब सुदर्शन ही उन्हें शांति मार्ग की सलाह देते हैं। अंत में नाटक अहंकार का विनाश, शांति के महत्व और धर्म की विजय का संदेश देता है। नाटक का निर्देशन संजय त्रिपाठी ने किया। संस्कृत संस्थान की अध्यापिका डॉ. ममता पांडेय ने नाटक के कुछ अंश का संस्कृत में अनुवाद किया। मंच पर सूत्रधार के रूप में अभिषेक सिंह के अलावा मनोज तिवारी, पीयूष पांडेय, सुरेश प्रसाद श्रीवास्तव, संजय शर्मा, संतोषी, तरुण यादव, सूरज आदि ने भूमिकाएं निभाईं।
दूतवाक्यम् के जरिये मंच पर उतरी महाभारत की कथा- फोटो : करंट लगने से किसान की मौत के बाद रोते बिलखते परिजन।
दूतवाक्यम् के जरिये मंच पर उतरी महाभारत की कथा- फोटो : करंट लगने से किसान की मौत के बाद रोते बिलखते परिजन।