लखनऊ। मदरसा दारुल मुबल्लिगीन पाटानाला के वरिष्ठ अध्यापक कारी मोहम्मद सिद्दीक ने कहा कि रसूल-अल्लाह की लाई हुई शरीअत सारी इंसानियत के लिए रहमत है। वह शनिवार को एक मीनारा मस्जिद, अकबरी गेट चौक में मरकजी जमीयतुल हुफ्फाज की ओर से आयोजित सालाना बारह रोजा नबीए आखिरुज्जमां के नौवें जलसे को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि इस्लाम ने बिना किसी भेदभाव के सभी इंसानों को अहमियत दी है। एक व्यक्ति की हत्या को पूरी इंसानियत की हत्या के समान बताया गया है। इस्लाम भाईचारे, समानता, हमदर्दी और इंसाफ की तालीम देता है। इस्लाम सभी इंसानों के साथ भाईचारे और समानता का व्यवहार सिखाता है। रहम, करम, हमदर्दी, सहिष्णुता, सेवा और भलाई को महत्व देता है। उन्होंने कहा कि इस्लाम जुल्म, जोर-जबरदस्ती और फितना-फसाद का विरोध करता है। कत्ल और खूनरेजी को सख्त गुनाह और गंभीर अपराध बताया गया है।
इंसानों की भलाई और कामयाबी के लिए इस्लामी तहजीब और तालीमात महत्वपूर्ण हैं। इसमें इंसाफ और मानवता की रक्षा पर जोर दिया गया है।
जलसे में शोअराए किराम मोहम्मद अरशी, मोहम्मद बिलाल, मोहम्मद समीर और कारी मोहम्मद ताहा ने नात व मनकबत का नजराना पेश किया। जलसे की अध्यक्षता हाफिज अब्दुल रशीद ने की। आगाज कारी मोहम्मद नोमान और कारी मोहम्मद बिलाल की तिलावते कुरआन पाक से हुआ। जलसे का समापन कारी मोहम्मद सिद्दीक की दुआ के साथ हुआ।