स्कैनिया बसों में इमरजेंसी दरवाजे के पास लगीं सीटें हटाई जाने लगी हैं। इन सीटों के हटने से किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों को बाहर निकलने में आसानी होगी। सीटें हटाने की कवायद बुधवार से शुरू हो गईं हैं।
आगरा एक्सप्रेस वे पर मंगलवार को दुर्घटना के बाद स्कैनिया बस में आग लग गई थी, जिसमें मां-बेटी सहित चार की मौत हो गई थी। जांच में यह बात सामने आई कि स्कैनिया बसों के इमरजेंसी दरवाजे के पास दो सीटें लगा दी गई हैं, जिससे आपात स्थिति में यात्री बाहर नहीं निकल सकते।
ये सीटें अतिरिक्त कमाई के लिए गलत तरीके से लगाई गईं। निगम की प्राविधिक इकाई के अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा कारणों के चलते इमरजेंसी दरवाजे पर सीटें नहीं होना चाहिए। परिवहन निगम ने पहले सुरक्षा कारणों के चलते इमरजेंसी गेट के पास की जगह को खाली रखा था, जिससे अप्रिय घटना के दौरान यात्री आसानी से बच सकें।
‘अमर उजाला’ ने इस मुद्दे को एक दिन पहले उठाया भी था। मामला तूल पकड़ने के बाद परिवहन निगम ने इन सीटों को हटाने का फैसला किया है।
निगम के आला अफसरों के निर्देश पर बुधवार से स्कैनिया सहित विभिन्न एसी बसों के इमरजेंसी डोर के पास से लगीं सीटें हटाने का सिलसिला शुरू कर दिया गया है। बुधवार को कई स्कैनिया एवं वॉल्वो बसों से सीटें हटाई गईं।
आलमबाग बस टर्मिनल से चलती हैं 32 स्कैनिया बसें
लखनऊ परिक्षेत्र में 32 स्कैनिया बसों का अनुबंध 7 रूटों पर है। इनमें लखनऊ से दिल्ली, जयपुर, आगरा, गोरखपुर, देहरादून, इलाहाबाद व वाराणसी रूट शामिल हैं। आने वाले समय में यात्री सुरक्षित रहे इसके लिए इमरजेंसी गेट के पास लगी सीटें हटाने के बाद बसों को इन रूटों पर रवाना किया जाएगा।