लखनऊ में यौम-ए-जैनब की मजलिस पढ़ते मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी।
लखनऊ। यौम-ए-आशूर के दूसरे दिन ग्यारह मुहर्रम पर पुराने लखनऊ की फिजा एक बार फिर गम-ए-हुसैन में डूब गई। सआदतगंज स्थित रौजा-ए-फातमैन से दरगाह हजरत अब्बास तक मंजर-ए-कर्बला का जुलूस निकाला गया। जुलूस में शामिल अजादारों की आंखें अश्कबार थीं और फिजा या हुसैन... या हुसैन, लब्बैक या हुसैन तथा अम्मूजान अल-अतश... सारे बच्चे प्यासे हैं की सदाओं से गूंज रही थी।
सिर पर मिट्टी के खाली कूजे उठाए मासूम बच्चों की पुकार ने कर्बला के तपते रेगिस्तान में प्यास से तड़पते हुसैनी खेमे, खासकर जनाबे सकीना और हजरत अली असगर की दर्दनाक प्यास का मंजर लोगों की आंखों के सामने जीवंत कर दिया। यह दृश्य देखकर अनेक अजादार अपने आंसू नहीं रोक सके।
अंजुमन जलाउल ईमान की ओर से आयोजित मजलिस को मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने खिताब करते हुए कहा कि कर्बला इंसानियत, सब्र, हक और इंसाफ की सबसे बड़ी मिसाल है। वहीं, दरगाह हजरत अब्बास और इमामबाड़ा मीरन साहब में ग्यारह मुहर्रम पर अजादारों ने जंजीर, छुरी और कमा का मातम कर शहीदाने कर्बला को अपने खून का पुरसा दिया। या हुसैन की सदाओं और दर्दभरे नौहों के बीच मातम का सिलसिला देर तक चलता रहा।
यौमे जैनब की मजलिस में छलके आंसू
लखनऊ। इमामबाड़ा गुफरान मआब में यौमे जैनब की मजलिस गमगीन माहौल में आयोजित हुई। रात करीब नौ बजे शुरू हुई मजलिस में बड़ी संख्या में अजादारों ने शिरकत की। शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने मजलिस को खिताब करते हुए कर्बला के बाद जनाबे जैनब पर ढाए गए जुल्म, उनके सब्र, हिम्मत और पैगाम-ए-कर्बला को जिंदा रखने में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका पर रोशनी डाली।
लखनऊ में यौम-ए-जैनब की मजलिस पढ़ते मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी।
लखनऊ में यौम-ए-जैनब की मजलिस पढ़ते मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी।