लखनऊ। हार्ट अटैक पड़ने पर लक्षणों की पहचान करके मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। इमरजेंसी में हृदय रोग विशेषज्ञ न हो तो मौजूद फिजिशियन की भूमिका अहम साबित होगी। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसएस त्रिपाठी ने शनिवार को पीजीआई में हुए कार्डियक इमरजेंसी कॉन्क्लेव में ये बातें कहीं।
सोसाइटी फॉर एक्यूट केयर, ट्रॉमा और इमरजेंसी मेडिसिन (सेक्टेम) के संस्थापक डॉ. लोकेन्द्र गुप्ता ने कहा, सीने में भारीपन के साथ पसीना आने, बाएं हाथ में दर्द, गाल और जबड़े में खिंचाव जैसे लक्षण हार्ट अटैक के हो सकते हैं। ऐसा होने पर सबसे पहले मरीज को एस्प्रिन की 325 मिलीग्राम की गोली पानी में घोलकर पिला दें। हार्ट अटैक के 90 मिनट में यह दवाई मिलने पर नुकसान कम पहुंचता है।
कहा कि अस्पताल की इमरजेंसी में मौजूद फिजीशियन एंजियोग्राफी कर सकते हैं। इससे मरीज की जान बच जाएगी। पीजीआई के डॉ. ओपी संजीव ने बताया कि कॉन्क्लेव का उद्देश्य युवा आपातकालीन चिकित्सकों को प्रशिक्षित करना है। समारोह में डॉ. आदित्य कपूर, डॉ. ऋषि सेठी, डॉ. प्रेरणा कपूर और डॉ. हिमांशु गुप्ता ने विचार रखे। मौके पर डॉ. सोमनाथ लोंगवानी की देखरेख में क्विज हुई। डॉ. रूपाली खन्ना, डॉ. राजीव चौधरी, डॉ. आदित्य कपूर, डॉ. ऋषि सेठी, डॉ. प्रेरणा कपूर, और डॉ. हिमांशु गुप्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में दो डॉक्टरों को आपातकालीन चिकित्सा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इनमें कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मुकुल मिश्रा और यूरोलॉजिस्ट डॉ. राकेश कपूर शामिल रहे।