लखनऊ। केजीएमयू और बलरामपुर अस्पताल में मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने के नाम पर कमीशनखोरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि अस्पतालों में बेड खाली न होने पर मरीज के बाहर निकलते ही दलाल तीमारदारों से संपर्क कर लेते हैं। बेहतर इलाज का झांसा देकर उन्हें निजी अस्पताल पहुंचाया जाता है।
मंगलवार को दो दलालों की बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ। इसमें एक दलाल पुलिस से सेटिंग और मरीजों को निजी अस्पताल पहुंचाने के नेटवर्क का दावा कर रहा है। हालांकि, ऑडियो में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दलालों की बातचीत के कुछ अंश
दलाल-1- अरे, बलरामपुर को कैसे हैंडल करता हूं, तुम लोग जानते हो? कोई नहीं जानता।
दूसरा-2- यह बात तो सच है।
दलाल-1- बलरामपुर अस्पताल के दरोगा से लेकर सिपाही तक सब अपने खास हैं। वजीरगंज थाना भी अपना है। अगर मैं डेढ़ लाख रुपये खर्च कर रहा हूं तो बेवकूफ नहीं हूं।
दलाल-2 - पैसे का ही खेल है हर जगह। हम भी रायबरेली एम्स में करते थे, वहां 40-50 हजार रुपये ज्यादा मिलते थे।
दलाल-1- डेढ़ लाख रुपये खर्च करता हूं, जिसमें एक लाख रुपये वजीरगंज का खर्च है।
दलाल-2 - आपका नेटवर्क बहुत तेज है भाई।
दलाल-1- जिस दिन जाऊंगा, उस दिन नौकरी जाएगी...। 50 हजार रुपये में कितना मिलता है तुम्हें, 25 हजार?
दलाल-2 - हां।
दलाल-1- 30 हजार रुपये चाहिए?
दलाल-2- 30 हजार रुपये दिए तो ठीक है, लेकिन हम ट्रॉमा से काम नहीं करेंगे।
दलाल-1- ट्रॉमा में तुम्हारी निजी गाड़ियां सबसे ज्यादा आती हैं। वहां अंदर से डॉक्टर भेजते हैं। गाड़ी से उतरवाकर मरीज को भिजवाते हैं।
दलाल-2 - हम आपको बाद में बताएंगे कि कैसे काम करना है।
दोषियों पर होगी कार्रवाई
Iकोई डॉक्टर या कर्मचारी मरीजों को निजी अस्पताल में शिफ्ट कराते पकड़ा गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। पहले भी कुछ जूनियर डॉक्टरों पर कार्रवाई की गई थी। - डॉ. प्रेमराज सिंह, ट्रॉमा सेंटर प्रभारीI
Iमरीजों को निजी अस्पतालों में भेजे जाने की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा रैकेट चल रहा है तो संबंधित कर्मचारियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. बीकेएस चौहान, निदेशक, बलरामपुर अस्पतालI