लखनऊ। यूएसए के नागरिकों को ठगने वाले कॉल सेंटर का संचालन गुजरात के रियल एस्टेट कारोबारी विनीत धर्मेंद्र वशिष्ठ के इशारे पर हो रहा था। समिट बिल्डिंग में स्थापित इस कॉल सेंटर के जरिये ठगी की रकम पहले अमेरिका में मौजूद गिरोह तक पहुंचती थी और फिर हवाला के जरिये कॉल सेंटर के संचालकों के पास आती थी। विनीत ने समिट बिल्डिंग में अपने रुपये से कॉल सेंटर का पूरा सेटअप तैयार किया था। नायकर जयराज के नाम से दफ्तर के लिए जगह किराये पर ली गई थी। इसके लिए दो लाख रुपये प्रतिमाह का किराया दिया जाता था। नायकर जयराज को रेंट एग्रीमेंट के नाम पर हर माह 50 हजार रुपये मिलते थे।
एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि कोलकाता से गिरफ्तार किया गया विनीत 12वीं पास है और गुजरात के अहमदाबाद के भक्तिनगर का रहने वाला है। उसकी तीन रियल एस्टेट कंपनियां हैं। उसके खिलाफ अहमदाबाद के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन और औधाव थाने में आपराधिक मामले दर्ज हैं। नायकर जयराज विनीत का सहयोगी है और अहमदाबाद के नेशनल पार्क हाटकेश्वर श्मशान के पास का रहने वाला है। उसने चौथी कक्षा तक की पढ़ाई की है और विनीत का पूरा कारोबार देखता था।
रिंकी दास कोलकाता के नॉर्थ 24 परगना की रहने वाली है और 9वीं पास है। उसका कोलकाता में लश लुक्स नाम से पार्लर और टोसिक नाम से बार है। ठगी की सारी रकम हवाला के माध्यम से रिंकी के पास पहुंचती थी, जिसे वह खपाने का काम करती थी। रिंकी और विनीत काफी समय से एक-दूसरे से परिचित हैं। गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने एक आईपैड, एक आईफोन और पांच हजार रुपये बरामद किए हैं। छानबीन में चार्ल्स नाम के एक व्यक्ति का पता चला है, जिससे आरोपियों की व्हॉट्सएप के माध्यम से बातचीत होती थी।अभी यह जानकारी नहीं हो सकी है चार्ल्स भारत का रहने वाला है या अमेरिका का।
दो टीमें भेजी गई थीं कोलकाता
एडीसीपी ने बताया कि समिट बिल्डिंग से पकड़े गए विक्रम और ललित के माध्यम से मुख्य संचालक विनीत का नाम सामने आया था। विनीत, विक्रम और ललित एक-दूसरे के परिचित हैं। विक्रम कॉल सेंटर का मैनेजमेंट देखता था, जबकि ललित लैपटॉप, कंप्यूटर हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और इंटरनेट का काम संभालता था। विनीत का नाम सामने आने के बाद सर्विलांस की मदद से उसकी लोकेशन कोलकाता मिली थी। चार जुलाई को पुलिस की टीम कोलकाता भेजी गई थी। वहां पहुंचने पर पुलिस को नायकर जयराज और रिंकी के बारे में पता चला। इसके बाद महिला पुलिस की टीम कोलकाता भेजी गई, जिसने मिलकर विनीत, नायकर जयराज और रिंकी दास को गिरफ्तार किया।
जालसाजों का गैंग अमेरिका में, पकड़ना मुश्किल
छानबीन और पूछताछ में खुलासा हुआ है कि जालसाजों का पूरा गैंग अमेरिका में बैठे जालसाजों की मदद से ऑपरेट हो रहा था। ठगी की सारी रकम पहले उन लोगों के पास गिफ्ट कार्ड, डिजिटल वाउचर, कैश, गोल्ड या क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से पहुंचती थी। अमेरिका में बैठे जालसाज अपना हिस्सा निकालकर हवाला के माध्यम से कॉल सेंटर संचालक और उसके साथियों को भेजते थे। पुलिस को अभी यह पता नहीं चल सका है कि अमेरिका में मौजूद जालसाज वहीं के नागरिक हैं या भारतीय हैं।
एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि इस संबंध में दूतावास से संपर्क किया जा रहा है। पुलिस के जानकार बताते हैं कि अमेरिका में मौजूद जालसाजों को चिह्नित करना और पकड़ना लखनऊ पुलिस के लिए मुश्किल है। इसके लिए अन्य एजेंसियों की मदद लेनी पड़ेगी। फिलहाल पुलिस के पास अमेरिका में बैठे किसी भी जालसाज का नाम या सही पता नहीं है।
आरोपी रिंकीदास गुप्ता, विनीत धर्मेंद्र वशिष्ठ और नायकर जयराज।
आरोपी रिंकीदास गुप्ता, विनीत धर्मेंद्र वशिष्ठ और नायकर जयराज।