किराये के मकान की समस्या ने खूब हंसाया
लखनऊ। देवसु थियेटर आर्ट्स सोसाइटी की ओर से मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में 60 दिवसीय कार्यशाला के अंतर्गत तैयार की गई प्रस्तुति खुदा खैर करे... नाटक का मंचन किया गया। आत्माराम सामंत के मूल लेखन का श्रीधर जोशी ने नाट्य रूपांतरण किया और अशोक लाल ने निर्देशन किया। नाटक में किराये के मकान की समस्या को इस तरह से प्रस्तुत किया गया कि दर्शक हंसी से लोटपोट हो गए।
नाटक का नायक शराफत हुसैन जो कि वास्तव में एक विवाहित है और दूसरे शहर में नौकरी करने आया है। उस शहर में किराये का मकान ढूंढ़ते हुए एक ऐसा मकान किराये पर लेता है जहां का मकान मालिक केवल कुंवारों को मकान देता है। शराफत खुद को कुंवारा बताकर और अपनी बीवी को बहन बताकर मकान किराये पर ले लेता है। मकान मालिक अपनी बेटी पम्मी की शादी शराफत से कराकर उसे घर जमाई बनाना चाहता है। कई दिलचस्प घटनाओं के बाद शमीम के अब्बू (पिता) मीर साहब वहां आ धमकते है। अंत में नाटकीय परिस्थितियों में घटना का रहस्योद्घाटन होता है। सौरभ सिंह, अर्पित श्रीवास्तव, तारिक इकबाल, दीपा यादव, आनंद प्रकाश शर्मा, खुशी और मोहित यादव ने शानदार अभिनय कर दर्शकों को खूब हंसाया।
किराये के मकान की समस्या ने खूब हंसाया
किराये के मकान की समस्या ने खूब हंसाया