कैसरबाग स्थित बलराज साहनी सभागार नाटक का मंचन करते कलाकार।
लखनऊ। संस्कृति निदेशालय के सहयोग से वरिष्ठ रंगकर्मी शक्ति मिश्रा के निर्देशन में रविवार को बलराज साहनी सभागार में हास्य नाटक ‘दो बेचारे’ का मंचन हुआ। शुभारंभ वरिष्ठ रंगकर्मी विजय वास्तव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
नाटक की कहानी दो दोस्तों सौरभ और प्रकाश के इर्द-गिर्द घूमती है। सौरभ वेतन बढ़वाने के लिए बॉस से झूठ बोल देता है कि उसकी शादी हो चुकी है। बॉस उसकी पत्नी के हाथ का खाना खाने के लिए रात आठ बजे घर आने की बात कहता है। इसके बाद दोनों दोस्त सौरभ के झूठ को सच साबित करने के लिए पत्नी की तलाश में जुट जाते हैं।
बॉस के आने से पहले मिर्जा शायर, किन्नर, संगीतकार और समाजसेवी तारा समेत कई किरदार साैरभ की मुश्किलें बढ़ाते हैं। अंततः तारा पत्नी बनने के लिए तैयार होती है। तारा के हाथ का खाना खाकर बॉस कहता है कि सौरभ बहुत भाग्यशाली है, जिसे अच्छा खाना बनाने वाली पत्नी मिली है। मेरी बीवी को तो चाय तक बनानी नहीं आती। जबकि तारा बॉस की पत्नी होती है। यह सच्चाई सामने आते ही पूरा मामला उलझ जाता है। हास्य के बीच नाटक ने संदेश दिया कि स्वार्थ के लिए बोला गया झूठ नई परेशानियों को जन्म देता है।
कैसरबाग स्थित बलराज साहनी सभागार नाटक का मंचन करते कलाकार।
कैसरबाग स्थित बलराज साहनी सभागार नाटक का मंचन करते कलाकार।
कैसरबाग स्थित बलराज साहनी सभागार नाटक का मंचन करते कलाकार।