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Lucknow News: गोमती की स्वच्छता के संकल्प से बढ़ी है चुनौतियों की फेहरिस्त

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कुड़िया घाट से पहले गोमती नदी में गिरता नाले का गंदा पानी।  - फोटो : संवाद
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को छठ पूजा के माैके पर एक बार फिर गोमती को एक से डेढ़ वर्ष में स्वच्छ और निर्मल कराने का संकल्प दोहराया है। ये भी कहा है कि गोमती में कोई ड्रेनेज या सीवर नहीं गिरेगा। हालांकि, गोमती में गिरने वाले सभी सीवर और नालों को रोकना इतना भी आसार नहीं। शासन खुद इसे कठिन और चुनौतीपूर्ण मानता है।

अभी शासन के पास जो योजना है उसमें लक्ष्य यही है कि नए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाकर गोमती में गिरने वाले नालों को रोका जाए, लेकिन इस योजना को धरातल पर लाने के लिए करीब 2000 करोड़ रुपये की जरूरत और समयबद्ध काम के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति चाहिए। मौजूदा समय में शहर की जल निकासी वाले 26 नाले, जो पहले गोमती में गिरते थे उन्हें भरवारा और दौलतगंज एसटीपी से जोड़ा गया। इसके बाद सात बड़े नाले अभी भी सीधे गोमती नदी में गिर रहे हैं। इनमें चार नाले पुराने शहर में लगने वाले इलाकों के हैं। तीन नाले नए क्षेत्र के हैं। इन्हीं से गोमती प्रदूषित हो रही है।
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जल निगम के अफसर कहते हैं कि शहर का दायरा बढ़ने और नई कालोनियों के विकसित होने से नाले बढ़ गए हैं। यह नाले मौजूदा एसटीपी से नहीं जुड़े हैं और सीधे गोमती मेंं गिर रहे हैं। नालों के सीधे नदी में गिरने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कई बार आपत्ति कर चुका है।





सीवर ज्यादा, एसटीपी कम

- अभी शहर में निकलने वाले सीवर और नालों के गंदे पानी को ट्रीट करने के लिए शहर में तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं। इनमें एक गोमती नगर विस्तार क्षेत्र के भरवारा, दूसरा पुराने लखनऊ के दौलतगंज और तीसरा लोहिया पथ पर हैदर कैनाल पर पर बना है।

- शहर में अभी करीब 790 एमएलडी सीवर और नालों का पानी निकलता है और ट्रीटमेंट प्लांट सिर्फ 520 एमएलडी क्षमता के ही हैं। ऐसे में 270 एमएलडी सीवर बिना ट्रीट हुए ही सीधे गोमती नदी में जा रहा है।

- जब लोनीपुरवा का चौथा एसटीपी शुरू हो जाएगा तो भी 220 एमएलडी सीवर निस्तारण के लिए एसटीपी की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में चार नए एसटीपी बनाने की जरूरत होगी। जिनकी योजना पहले ही बन चुकी है, मगर बजट के चक्कर में अमल नहीं हो पाया।
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कुकरैल भी होगी निर्मल

नाले में तब्दील हो चुकी कुकरैल नदी को पुनर्जीवित कर उसे नदी के तहर विकसित करने को लेकर भी मुख्यमंत्री की पहल पर काम हो रहा है। इसके लिए कुकरैल में गिरने वालों नालों के पानी को साफ करने के लिए 40 एमएलडी क्षमता का एसटीपी बनाया जाएगा। इसके जरिये कुकरैल को गंदा कर रहे 17 नालों के पानी को शोधित किया जाएगा, क्योंकि कुकैरल भी गोमती में ही जाकर गिरती है। अभी नालों उसका करीब 50 एलएलडी पानी सीधे गिर रहा है और कुकरैल नदी के पानी को गंदा कर रहा है। पानी को साफ करने के लिए भारी भरकम बजट इसलिए भी खर्च किया जा रहा है क्योंकि कुकरैल नदी को पुनर्जीवित कर उसे गुजरात के साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकसित करने की राह में पानी की कमी एक बड़ी समस्या है।





ये भी हैं चुनौतियां

0 गोमती किनारे बसी बस्तियों को हटाना पड़ेगा।

0 एसटीपी बनाने के लिए करीब 2000 करोड़ रुपये बजट की जरूरत होगी जो कई साल से नहीं मिल रही है।

0 गोमती में लोग गंदगी न डालें इसके लिए निगरानी समिति बनानी पड़ेगी।

0 गोमती में अक्सर पानी की कमी हो जाती है ऐसे में उसमें पानी भी बढ़ाना होगा।

0 गोमती का प्राकृतिक नदी है जो पीलीभीत के माधव टांडा से निकलती है। इस दौरान भी जहां पर भी नाले गिरते हैं, उनको भी बंद करना होगा।
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