लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के हड्डी रोग विभाग में चिकित्सीय लापरवाही का मामला सामने आया है। रीढ़ की हड्डी में चोट के शिकार मरीज को अधूरी जांच के आधार पर ऑपरेशन के लिए ओटी तक पहुंचा दिया गया। वहां जब डॉक्टरों ने मरीज की फाइल देखी, तो पता चला कि दिल की जांच कराई ही नहीं गई थी। आनन-फानन में मरीज को जांच के लिए लॉरी भेज दिया गया। वहां भी मरीज पांच घंटे तक स्ट्रेचर पर पड़ा रहा, मगर जांच नहीं हुई। ऐसे में ऑपरेशन ही टल गया।
इस लापरवाही का खामियाजा देवा के रामकृष्ण नगर निवासी 41 वर्षीय अच्छेलाल राजभर को भुगतना पड़ा, जो सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें केजीएमयू के हड्डी रोग विभाग में भर्ती कराया गया था, जहां 10 दिनों से उनका इलाज चल रहा था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी थी, जिसके लिए परिजनों ने डॉक्टरों की बताई सभी जांच करवाईं, लेकिन दिल की जांच के लिए डॉक्टरों ने निर्देशित ही नहीं किया।
शुक्रवार सुबह मरीज का ऑपरेशन तय था। उन्हें सुबह आठ बजे ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया, लेकिन ओटी में डॉक्टरों को पता चला कि ईसीजी और ईको की रिपोर्ट फाइल में नहीं हैं, जिसके बाद मरीज को जांच कराने के लिए ओटी से बाहर निकाल दिया गया।
मरीज के बेटे विजय के अनुसार, वे पिता को तुरंत लॉरी कॉर्डियोलॉजी ले गए और ईसीजी के लिए 500 रुपये की फीस भी जमा कर दी। इसके बावजूद पांच घंटे तक स्ट्रेचर पर पड़े मरीज की कोई जांच नहीं की गई। पैरामेडिकल स्टाफ ने जांच से इन्कार कर दिया। दोपहर करीब दो बजे परिजन मरीज को बिना जांच के ही लिंब सेंटर ले आए। इस कारण ऑपरेशन भी टालना पड़ा।
Iमरीज की जांच लॉरी में किस वजह से नहीं हुई है, जबकि डॉक्टर ने परचे पर अर्जेंट लिखकर भेजा था। मामले की जांच कराई जाएगी। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई होगी।I
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- डॉ. केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयूI