लखनऊ। तीन दिन के नोटिस को छह दिन बीते गए, लेकिन नगर निगम के प्रचार विभाग ने अभी तक एक भी अवैध होर्डिंग से प्रचार सामग्री नहीं हटाई। मामला ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश हो रही है।
मंगलवार को नगर निगम सदन में अवैध होर्डिंग का मुद्दा उठने के बाद, बुधवार को प्रचार विभाग ने सभी विज्ञापन एजेंसियों को नेम प्लेट लगाने का नोटिस जारी किया था। इसमें एजेंसियों को नाम, मोबाइल नंबर और नगर निगम से मिली अनुमति का ब्योरा दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए नगर निगम ने तीन दिन का मौका दिया था, मगर तय समयसीमा बीतने के बाद भी कार्रवाई शुरू नहीं हुई।
जानकारों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। पिछले साल भी इसी तरह नोटिस जारी कर विभाग ने मामला टाल दिया था। वजह साफ है कि शहर में अवैध होर्डिंगें प्रचार विभाग की मिलीभगत से ही खड़े हैं।
कर्मचारी न होने का बहाना
प्रचार विभाग के नोडल अधिकारी ओम प्रकाश सिंह का कहना है कि जिन होर्डिंगों पर नेम प्लेट नहीं लगी हैं, वे ऊंची इमारतों की छतों पर लगे हैं। इन्हें हटाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी चाहिए, जो निगम के पास नहीं है। फिलहाल उन्हें ठेके पर लेने की तैयारी चल रही है। उन्होंने दावा किया कि जमीन पर लगे यूनिपोल वैध हैं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, शहर में करीब 50 यूनिपोल अवैध रूप से विभाग की मिलीभगत से लगे हुए हैं। इसके अलावा, जमीन पर लगे होर्डिंग, कियॉस्क और सूचना पट भी बड़ी संख्या में अवैध है, मगर इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
शहर में इतने होर्डिंग
निजी भवन व भूमि पर लगे होर्डिंग - 1442
यूनिपोल - 300
एलईडी स्क्रीन वाली होर्डिंग - 48
Iअवैध होर्डिंगों से प्रचार सामग्री हटाई जानी है। इसके लिए प्रशिक्षित कर्मचारी की तलाश की जा रही है। दो-तीन दिन में अभियान चलाया जाएगा।I
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- ओम प्रकाश सिंह, नोडल अधिकारी, प्रचार विभाग नगर निगमI
शहर में लगे होर्डिंग।
शहर में लगे होर्डिंग।
शहर में लगे होर्डिंग।
शहर में लगे होर्डिंग।