लखनऊ। नगर निगम की केंद्रीय कार्यशाला में गाड़ियों की मरम्मत में होने वाले फर्जीवाड़े और देरी पर अब अंकुश लग सकेगा। मरम्मत अब एप के माध्यम से होगा, जिसका ट्रायल शुरू हो चुका है।
नगर निगम के पास सफाई, मलबा उठान, मार्ग प्रकाश और अन्य कार्यों के लिए करीब 500 छोटी-बड़ी गाड़ियां हैं। इनकी मरम्मत पर हर साल छह से सात करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जिसमें अक्सर फर्जीवाड़ा और देरी की शिकायतें आती रही हैं। अब ऐप के माध्यम से गाड़ी की खराबी, सर्वे, पार्ट्स की रिपोर्ट और फोटो अपलोड किए जाएंगे। इससे यह स्पष्ट रहेगा कि गाड़ी में क्या खराबी थी और कौन सा पार्ट्स बदला गया। साथ ही, गाड़ी कब मरम्मत के लिए आई और कब ठीक हुई, इसका पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा।
देरी करने वालों पर होगी कार्रवाई
मुख्य अभियंता मनोज प्रभात ने बताया कि ऐप लागू होने से मरम्मत में होने वाली लापरवाही पर लगाम लगेगी और काम प्रभावित नहीं होगा। मरम्मत के लिए समय सीमा भी तय कर दी गई है। छोटी मरम्मत के लिए एक से दो दिन और बड़ी मरम्मत के लिए चार से पांच दिन का समय तय किया गया है। इससे अधिक देरी करने वाले कर्मचारियों की पहचान हो जाएगी, जो पहले फाइलों को दबाकर देरी करते थे। एप का नाम तयकर जल्द ही इस नई व्यवस्था का लोकार्पण किया जाएगा।