लखनऊ। जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना बृहस्पतिवार को नगर के कामकाज की समीक्षा करेंगे। इसको लेकर उनकी ओर से बैठक बुलाई गई है। बैठक नगर निगम में होगी, जिसमें महापौर भी शामिल होंगी। ऐसे में माना जा रहा है कि बैठक में महापौर और नगर आयुक्त के बीच 10 दिनों से चल रहा अधिकारों के विवाद का मुद्दा फिर गरमा सकता है।
बीती 24 अक्तूबर को कार्यकारिणी बैठक में महापौर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के बीच अधिकारों को लेकर टकराव हो गया था। इसके कारण कार्यकारिणी बैठक में कोई प्रस्ताव पास नहीं हो सका था और बैठक बेनतीजा रही थी। इसके बाद 30 अक्तूबर को दोबारा बैठक बुलाई गई थी, जिसमें महापौर और नगर आयुक्त के बीच फिर अधिकारों को लेकर और कार्यकारिणी में पास पुराने प्रस्तावों पर अमल न होने को लेकर विवाद हो गया था।
बैठक के बाद महापौर ने पिछले ढाई साल के कार्यकाल के दौरान पास हुए उन दर्जन भर से अधिक प्रस्तावों का मामला उठाया था, जिन पर निगम प्रशासन ने अमल नहीं किया था। इस विवाद के कारण नगर निगम का पुनरीक्षित बजट भी फंसा हुआ है, जिसे अक्तूबर में ही पास हो जाना चाहिए था, मगर अब तक नहीं हुआ है।
विवाद के बाद महापौर ने यह भी कहा था कि अब कार्यकारिणी की बैठक तभी होगी, जब नगर आयुक्त खुद बुलाएंगे और यह बताएंगे कि जो लंबित प्रस्ताव थे, उन पर अमल हो गया है। इस विवाद को लेकर शासन भी गंभीर है। अब बृहस्पतिवार को जिले के प्रभारी मंत्री की होने वाली बैठक में वह इस विवाद को सुलझाने की पहल कर सकते हैं। चर्चा यह भी है कि सरकार की ओर से प्रभारी मंत्री को इसके लिए कहा भी गया है कि वह विवाद शांत कराएं।
इन मुद्दों को लेकर ज्यादा है विवाद
हाईकोर्ट में पैनल अधिवक्ता नमित शर्मा की जगह शैलेंद्र सिंह चौहान को नियुक्त न करना
सड़कों के गड्ढे भरने को लेकर बजट की कमी का मामला
सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों का मामला
अपर नगर आयुक्तों के बीच कार्य विभाजन का मामला
जोनल अधिकारियों के जोन बदलने और हटाने का मामला
मार्ग प्रकाश विभाग में टेंडर का विवाद
सफाई कार्य में लगी निजी कंपनियों के काम में लापरवाही पर कार्रवाई का विवाद