लखनऊ। नगराम में आशा कार्यकर्ता के जरिये दंपती को बच्चा दिलाने के मामले की जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नोटिस जारी कर मामले को भूल गए। अभी तक न आशा और न अस्पताल संचालक के बयान दर्ज हुए हैं। ऐसे में यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि वह बच्चा आखिर किसका था और कहां से लाया गया था।
मोहनलालगंज के समेसी निवासी किसान रामहर्ष विक्रम (61) और उनकी पत्नी मायावती के मुताबिक, 12 अगस्त को उनके घर आई आशा कार्यकर्ता ने उन्हें नबीनगर चौराहा स्थित क्लीनिक में मानसिक मंदित महिला के बच्चे को जन्म देने की जानकारी दी। दंपती आशा के साथ वहां गए और बच्चे को साथ ले आए। हालांकि, अस्पताल से बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा था, जिसके बाद दंपती ने बच्चे को कानूनी हक दिलाने के लिए डीएम और सीएमओ को पत्र भेजने के साथ ही समाधान दिवस में भी गुहार लगाई।
मामले का खुलासा होने के बाद, बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड लाइन की संयुक्त टीम ने बच्चे का रेस्क्यू किया और बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया, जहां से उसे शिशु गृह भेज दिया गया। सीएमओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए लगभग 15 दिन पहले जांच कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने अस्पताल संचालक और आशा कार्यकर्ता को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था, लेकिन अभी तक दोनों के बयान दर्ज नहीं हुए हैं। ऐसे में जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि जांच कमेटी अपना काम कर रही है और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।