कागजों का नवीनीकरण न होने के कारण खड़ी जांच वैन।
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लखनऊ। रमजान के बीच बाजारों में रौनक बढ़ चुकी है। मिठाइयों और खाद्य सामग्री की बिक्री तेज है। कुछ ही दिनों में होली व ईद जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं। ऐसे में मिलावटखोर भी सक्रिय हैं। मिलावट पर लगाम लगाने के लिए ही खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग ने करीब दो वर्ष पहले लगभग 45 लाख रुपये की लागत से मोबाइल जांच वैन खरीदी थी जो अब धूल फांक रही है।
यह विशेष जांच वैन महीनों से खाद्य सुरक्षा निदेशालय परिसर में खड़ी है। सूत्र बताते हैं कि इस वैन की न फिटनेस है और न बीमा। प्रदूषण प्रमाणपत्र भी समाप्त हो चुका है। त्योहारी सीजन में मिलावट की आशंका सबसे ज्यादा होती है। ऐसे समय में जब वैन को बाजार में होना चाहिए, यह किसी काम नहीं आ रही। इसके पीछे अफसरों की लापरवाही और उदासीनता प्रमुख वजह है।
वाहन के अभिलेख बताते हैं कि यह वैन 28 फरवरी 2023 को खरीदी गई और 10 अप्रैल 2023 को पंजीकृत हुई। पंजीकरण नौ अप्रैल 2038 तक वैध है, लेकिन फिटनेस प्रमाणपत्र पांच अप्रैल 2025 को समाप्त हो चुका है। बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र की अवधि भी खत्म हो चुकी है। नवीनीकरण न होने से वैन सड़कों पर नहीं उतर पा रही।
यह वही वैन है जिसे बाजार व मोहल्लों में जाकर खाद्य पदार्थों के नमूने लेने और लोगों को मिलावट के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से खरीदा गया था। अब जब बाजार में दूध, खोवा, मिठाई और मसालों की खपत चरम पर है, तब जांच की गाड़ी रुकी है और मिलावट की रफ्तार बढ़ी हुई है।
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा विजय प्रताप सिंह का कहना है कि कुछ कमियों के कारण वाहन का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में मंडल मुख्यालय को अवगत करा दिया गया है। जल्द ही सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएंगी और रोस्टर बनाकर वैन को शहर के मोहल्लों में खाद्य पदार्थों से जुड़ी जागरूकता के लिए भेजा जाएगा।