राज्य ललित कला अकादमी में प्रो. पृथ्वीनाथ भार्गव की कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई।
लखनऊ। कलाकारों के समग्र सृजन को जन सामान्य के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए सिंहावलोकन प्रदर्शनी (रिट्रास्पेक्टिव) का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में सोमवार को कैसरबाग में लाल बारादरी स्थित राज्य ललित कला अकादमी में प्रो. पृथ्वीनाथ भार्गव की 114 कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई। इनमें रेखाकंन, जलरंग, दृश्य चित्रण, फोक और पोर्टेट आधारित कलाकृतियां शामिल हैं। इस अवसर पर प्रो. पृथ्वीनाथ भार्गव के व्यक्तित्व व कृतित्व पर आधारित मोनोग्राफ का विमोचन भी किया गया।
प्रदर्शनी का शुभारंभ अकादमी के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा, उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र मिश्र, सदस्य डॉ. सुनील कुशवाहा, किरण सिंह राठौर ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर प्रो. भार्गव के पुत्र डॉ. आरके भार्गव, डॉ. सरोज भार्गव, शोध छात्रा व मोनोग्राफ की लेखिका डॉ. आभा ने उनके कलाकर्म के बारे में बताया। अकादमी के निदेशक अमित अग्निहोत्री ने बताया गया कि यह प्रदर्शनी 27 फरवरी तक सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक आमजन के अवलोकनार्थ खुली रहेगी। समारोह में अकादमी के पूर्व अध्यक्ष सीताराम कश्यप, पूर्व उपाध्यक्ष उमेश कुमार सक्सेना, डॉ. सुनील सक्सेना, संदीप भाटिया, प्रतिमा सिंह व अन्य कलाकार मौजूद रहे।
आर्ट कॉलेज से ग्रहण की थी शिक्षा प्रो. पृथ्वीनाथ भार्गव का जन्म 1913 में आगरा में हुआ था। उन्होंने 1933-1939 तक आर्ट काॅलेज, लखनऊ में शिक्षा ग्रहण की। 1974 में दिल्ली व 1991 में रायपुर में उनकी कलाकृतियों की एकल प्रदर्शनी आयोजित की गई। वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में नियमित प्रतिभाग करते रहे। उन्हें 1941 में मैसूर दशहरा कला प्रदर्शनी सम्मान, 1983 में राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह द्वारा प्रशस्ति पत्र, 1985 में स्वास्तिक सम्मान से नवाजा गया था। प्रो. पृथ्वीनाथ भार्गव ने वस्तु एवं प्रकृति चित्रण का प्रकाशन किया था। वे ललित कला संस्थान मथुरा और बृज नाट्य परिषद के 1958 व 1963 में अध्यक्ष रहे।
राज्य ललित कला अकादमी में प्रो. पृथ्वीनाथ भार्गव की कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई।