लखनऊ। अधिकारों को लेकर महापौर सुषम खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के बीच करीब दो सप्ताह से चल रहा टकराव थम नहीं रहा है। शुक्रवार को संपूर्ण समाधान दिवस में महापौर ने नगर निगम अफसरों को सबके सामने जमकर फटकरा। कहा कि अधिकारी-कर्मचारी सब जनता के नौकर हैं। यदि अधिकारियों के अधिकार हैं तो जनता ने भी मुझे अधिकार दिए हैं।
समाधान दिवस में लोगों की शिकायतों पर महापौर ने अफसरों को खूब सुनाया। कुछ अफसरों के मौजूद न होने पर भी भड़कीं। आठ जोनल अफसरों की हाजिरी ली तो पता चला तीन अनुपस्थित हैं। अपर नगर आयुक्त ललित कुमार महापौर के गुस्से को देख वहां से चले गए। नगर आयुक्त गौरव कुमार समाधान दिवस में शामिल ही नहीं हुए। उन्होंने बताया कि कि वह याचिका समिति की बैठक में गए हैं।
महापौर सुबह करीब सवा दस बजे नगर निगम मुख्यालय में आयोजित समाधान दिवस में पहुंचीं। एक भवनस्वामी ने बताया कि उसने पिछले महीने ही अपना गृहकर जमा किया है। अब उसे नया बिल भेजा गया है जिसमें 2014 से गृहकर को पुनरीक्षित कर बढ़ा दिया गया है। यह सुन महापौर का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने जोनल अफसर जोन छह अमरजीत को तलब किया। अमजीत चार दिन पहले ही जोन छह में तैनात हुए हैं। उन्होंने कहा मामले को दिखवाते हैं। इस पर महापौर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब उन्होंने आदेश कर दिया है कि 2022 के पहले से गृहकर को नहीं बढ़ाया जाएगा तो फिर 2014 से क्यों बढ़ाया जा रहा है। एक वर्ष से समाधान दिवस लग रहा है और शिकायतें बंद नहीं हो रही हैं। जनता अपना काम छोड़कर समाधान दिवस में आ रही है और अधिकारी सुन नहीं रहे हैं।
जो नहीं सुनेंगे वह स्पष्टीकरण हाथ में लेकर आएं....
नाराज महापौर ने कहा जोनल अफसर उनके आदेश के बाद भी 2022 के पहले से गृहकर को पुनरीक्षित करके बढ़ा दे रहे हैं। ऐसे में अब और शिकायतें आईं तो संबंधित जोनल अफसर अपना स्पष्टीकरण हाथ में लेकर आएंगे। सब जनता के नौकर हैं तो जवाब भी देना होगा। ऐसी मनमानी नहीं चलेगी।
प्रभारी मंत्री की मध्यस्थता भी काम न आई
समाधान दिवस में महापौर का गुस्सा देखकर नगर निगम के अधिकारी सकते में हैं। कई विभागीय और पीसीएस अफसर यह भी कहने लगे कि वह इतनी बेइज्जती सहन नहीं कर सकते, भले ही उनको यहां से ट्रांसफर लेना पड़े। कुछ अफसरों का कहना था कि बृहस्पतिवार को हुई जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना की बैठक में महापौर कुछ खास बोल नहीं पाईं। वह तब भी गुस्से में थीं, लेकिन खामोश रहीं। समाधान दिवस पर जब मौका मिला तो उन्होंने पूरा गुस्सा उतारा।
Iजनता के प्रति सबकी जवाबदेही है। समाधान दिवस इसलिए लगाया जाता है कि शिकायतों का निस्तारण हो, मगर कई अफसर आए ही नहीं। जो नहीं आए या आकर चले गए। उनको वजह बतानी चाहिए। उनसे जवाब तलब किया जाएगा। अधिकारी मनमाने तरीके से 2022 से पहले से गृहकर बढ़ा दे रहे हैं, जो गलत है। जब भवनस्वामी अपना गृहकर जमा कर रहा है तो फिर अब क्यों बढ़ाया जा रहा है।I
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- सुषमा खर्कवाल, महापौरI
नगर निगम का समाधान दिवस।
नगर निगम का समाधान दिवस।
नगर निगम का समाधान दिवस।
नगर निगम का समाधान दिवस।