लखनऊ। वेंटिलेटर न मिलने से मरीजों की जान जा रही है। दूसरी ओर विशेषज्ञों और मैनपावर की कमी के कारण राजधानी के सरकारी अस्पतालों में 65 वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं। अमर उजाला में इस अव्यवस्था को सामने लाती खबर प्रकाशित होने के बाद शासन ने महानिदेशालय से सभी अस्पतालों में बंद पड़े वेंटिलेटरों का रिकॉर्ड तलब किया है।
300 बेड की क्षमता वाले लोकबंधु अस्पताल में 40 वेंटिलेटर हैं। हालांकि, इनमें से 10 पर ही मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। बाकी वेंटिलेटर बंद पड़े हैं। इसकी वजह यह है कि बीते वर्ष हुए अग्निकांड के बाद आईसीयू का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
बलरामपुर अस्पताल में 60 वेंटिलेटर बेड हैं, जिनमें से 28 का ही इस्तेमाल हो पा रहा है। मैनपावर और विशेषज्ञ की कमी से सभी वेंटिलेटर का संचालन नहीं हो रहा है। ठाकुरगंज अस्पताल और रानीलक्ष्मीबाई अस्पताल में पांच वेंटिलेटर हैं। यहां भी विशेषज्ञों की कमी से सभी वेंटिलेटर चालू नहीं हैं।
बीते सप्ताह बुजुर्ग की गई थी जान
देवरिया निवासी पारसनाथ पांडेय (65) को बीते सप्ताह केजीएयू से लेकर बलरामपुर अस्पताल तक दौड़ लगाने के बावजूद समय पर वेंटिलेटर नहीं मिला। एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस में करीब डेढ़ घंटे तक तड़पने के बाद उनकी बलरामपुर अस्पताल में मौत हो गई थी। इसके बाद अमर उजाला में राजधानी के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए खबर प्रकाशित की थी। इसमें बताया गया कि 65 वेंटिलेटर बंद पड़े हैं। इसके बाद शासन हरकत में आया है। अस्पताल प्रभारियों का कहना है वेंटिलेटरों के रिकॉर्ड की रिपोर्ट बनाकर भेजी गई है।