लखनऊ। जीवन में आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए हाथ, पैर और आंखें नहीं बल्कि हाैसलों की जरूरत होती है। केजीएमयू के अटल बिहारी वाजेपयी साइंटिफिक कंवेंशन सेंटर में आयोजित नाॅर्थ जोन एबिलिम्पिक्स में आए दिव्यांगों ने इस वाक्य को पूरी तरह से चरितार्थ किया। उनकी प्रतिभा देख दिव्यांगजन सशक्तीकरण मंत्री नरेंद्र कुमार कश्यप भी तारीफ किए बिना नहीं रह सके।
दिल्ली निवासी विष्णु अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाते हैं। वे प्लास्टिक के धागे से टोकरी बनाते हैं। मंत्री ने जब उनका हाल पूछा तो उन्होंने बताया कि चांदनी चाैक में वे टोकरियां बनाकर बेचते हैं। अरुणाचल प्रदेश में जब वे जाते हैं तो इन टोकरियों से उन्हें अच्छी आमदनी होती है।
नैनीताल की भारती के दोनों हाथ नाै साल की उम्र में एक दुर्घटना के बाद काटने पड़े थे। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और कटे हुए हाथों से छापे के माध्यम से कलाकृतियां और सजावटी सामान बनाना शुरू किया। अब इनकी अच्छी मांग है। हिमाचल प्रदेश की भगवती और उनकी कई साथी क्रोएशिया के माध्यम से ऊन के सामान बनाती हैं। ये सभी भले ही पैरों पर नहीं खड़े हो पाते, पर अपने हुनर के दम पर जीवन की गाड़ी चला रहे हैं। लखनऊ की शालिनी भी दिव्यांगता के बावजूद पेंटिंग के माध्यम से अपने हुनर का प्रदर्शन करती हैं।
कार्यक्रम का आयोजन नेशनल एबिलिम्पिक एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनएएआई) ने सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट के साथ आयोजित किया और इसमें दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और इंडसइंड बैंक का सहयोग रहा। कार्यक्रम में फोटोग्राफी, पेंटिंग एवं डेकोरेशन, टोकरी बनाना, बाल काटना, केक सजाना, कैरेक्टर डिजाइन, इंजीनियरिंग डिजाइन आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में महारत रखने वाले दिव्यांगों को सम्मानित किया गया।
काैशल और रोजगार से ही दिव्यांगजनों को सशक्त बनाया
दिव्यांगजन सशक्तीकरण मंत्री नरेंद्र कुमार कश्यप के मुताबिक काैशल और रोजगार से ही दिव्यांगजनों को सशक्त बनाया जा सकता है। प्रदेश सरकार इसके लिए काम कर रही है। उन्होंने इस पहल के लिए एनएएआई और सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट की सराहना की।
सबका लक्ष्य फिनलैंड जाकर रोशन करना है नाम
एनएएआई के महासचिव और सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट के संस्थापक एवं सीईओ डॉ. जितेंद्र अग्रवाल ने बताया कि देश के 2.68 करोड़ दिव्यांगजनों में से 64% से ज्यादा बेरोजगार हैं। उन्हें मदद देने वाले प्रशिक्षित विशेषज्ञों की बहुत कमी है। लखनऊ में हो रही इस प्रतियोगिता के विजेता नवंबर में दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय एबिलिम्पिक्स 2025 में हिस्सा लेंगे। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करने वाले दिव्यांग वर्ष 2027 में फिनलैंड में होने वाले अंतरराष्ट्रीय एबिलिम्पिक्स में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।