लखनऊ। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की लोक-संस्कृति की मोहक छांव में रचा-बसा उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड महोत्सव इन दिनों संगीत नाटक अकादमी के मुक्तकाशी मंच पर सांस्कृतिक रंगों से सराबोर हो रहा है। मुनाल संस्था की ओर से आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को जहां पहाड़ की गूंजती धुनें सुनाईं दीं वहीं, गंगा-जमुनी तहजीब के रंग-बिरंगे नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रभु श्रीराम की वंदना से हुई, जिसे मंदाकिनी बहुगुणा, विभा नौटियाल और शैलजा श्रीवास्तव के निर्देशन में प्रस्तुत किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में गढ़वाली, कुमाऊंनी, ब्रज, अवधी, महाराष्ट्रीयन और पंजाबी लोकनृत्य शामिल रहे। ऋचा जोशी के निर्देशन में परमा सिन्हा, आकांक्षा आनंद और मेनका श्रीवास्तव ने अवधी, भोजपुरी और राजस्थानी लोकगीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वादन में संजय श्रीवास्तव और डॉ. आशुतोष नौटियाल जैसे अनुभवी कलाकारों की संगत रही। महोत्सव के दौरान विभिन्न आयु वर्ग के लगभग 90 प्रतिभागियों ने गायन, वादन और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों से मंच को जीवंत कर दिया। आकाशवाणी, दूरदर्शन एवं भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय से जुड़े कलाकारों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को लोक-संस्कृति की गहराइयों से रूबरू कराया।
महोत्सव में विभिन्न जिलों के पारंपरिक उत्पादों के स्टॉल भी सजाए गए जहां शिल्प और स्वाद दोनों का संगम देखने को मिला। मंच संचालन मोहन सिंह बिष्ट ने किया। अंत में मुनालश्री विक्रम बिष्ट ने सभी का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विधान परिषद सदस्य संतोष सिंह, कैंसर संस्थान के अधीक्षक डॉ. देवाशीष शुक्ल एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रामकुमार मौजूद रहे। मुनाल संस्था की ओर से दिवंगत लोक संस्कृति सलाहकार विभूति राम मानस की स्मृति में ‘स्मृति सम्मान’ डॉ. देवेंद्र चौहान और यशभारती सम्मानित लोक कलाकार ऋचा जोशी को प्रदान किया गया। उन्हें अंगवस्त्र, प्रतीक चिह्न और प्रमाणपत्र देकर मुख्य अतिथियों के साथ मुनालश्री विक्रम बिष्ट ने सम्मानित किया।
इस अवसर पर किसान नेता तारा सिंह बिष्ट, राजेंद्र चौहान, युवराज परिहार, चंद्र मोहन पंत समेत बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।