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Lucknow News: पंचवटी के मंचन में जीवंत हुए वनवास प्रसंग

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पंचवटी के मंचन में जीवंत हुए वनवास प्रसंग
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लखनऊ। राय उमानाथ बलि प्रेक्षागृह का मंच सोमवार को रामायण के वनवास काल के भावनात्मक और आध्यात्मिक प्रसंगों से जीवंत हो उठा। भारतीय नारी सम्मान व बाल विकास संस्थान के 25वें स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित नाटक ‘पंचवटी’ के मंचन ने दर्शकों को श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनवास काल की कथा से जोड़ा। कलाकारों के अभिनय के साथ संगीत और प्रकाश संयोजन ने मंच पर प्रसंगों को प्रभावशाली बना दिया।
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महाकवि तुलसीदास की कथा पर आधारित नाटक का नाट्यलेखन और निर्देशन मुकेश वर्मा ने किया। प्रस्तुति में चित्रकूट और पंचवटी की पांच कुटियों के आध्यात्मिक महत्व के साथ श्रीराम का आदर्श आचरण, सीता का धैर्य-समर्पण और लक्ष्मण की भ्रातृ-सेवा प्रमुखता से उभरी। संवाद, वेशभूषा और मंच सज्जा ने वनवास के दृश्यों को प्रभावशाली रूप दिया।

श्रीराम की भूमिका में ऋषभ पांडेय, लक्ष्मण के रूप में शशांक पांडेय, शूर्पणखा की भूमिका में अनामिका सिंह और निद्रा देवी और सीता की दोहरी भूमिका में प्रांजल शर्मा ने अभिनय से दर्शकों की सराहना बटोरी। उद्घोषणा तान्या वर्मा ने की।
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कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली 25 से अधिक हस्तियों को सम्मानित किया गया। इनमें अशोक कुमार गौड़, मोहम्मद हसनैन, नरेंद्र बाबू, मेराजुद्दीन सिद्दीकी, गनेश चौधरी, सुनील विश्वकर्मा, संजय त्रिपाठी और महर्षि कपूर समेत अन्य लोग शामिल रहे।

पंचवटी के मंचन में जीवंत हुए वनवास प्रसंग

पंचवटी के मंचन में जीवंत हुए वनवास प्रसंग

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