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Lucknow News: देश की संस्कृति के अनुरूप हो शिक्षा व्यवस्था

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शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की ओर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर विशेष चर्चा व विमर्श कार्यक
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लखनऊ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में देश की शिक्षा, हमारी संस्कृति और प्रकृति के अनुरूप कैसे बने, इस विषय पर रविवार को गोमती नगर स्थित आर के मित्तल सभागार में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास अवध प्रांत की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर विधान परिषद् सदस्य व एसआर ग्रुप के चेयरमैन पवन सिंह चौहान और अध्यक्ष के तौर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के राष्ट्रीय सह संयोजक संजय स्वामी मौजूद रहे।
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पवन सिंह चौहान ने कहा कि देश को आत्म निर्भर बनाना है, तो देश के छात्रों को शिक्षा के जरिए आत्मनिर्भर बनाना होगा। संजय स्वामी ने कहा कि लोकतंत्र में, सरकार और समाज दोनों के मिले-जुले प्रयास से ही किसी भी क्षेत्र में बदलाव संभव है। न्यास के प्रयासों से यौन शिक्षा के विकृत पाठ्यक्रम को रोकने में हमें सफलता मिली है। देश के अधिकतर विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह अब भारतीय वेशभूषा और परंपरा के अनुरूप होने लगे हैं। वैदिक गणित विषय में 38 विश्वविद्यालयों व इतने ही महाविद्यालयों ने न्यास के साथ अनुबंध (एमओयू) करके पाठ्यक्रम शुरू कर दिया है। विश्वविख्यात गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के जन्मदिवस को ''''राष्ट्रीय गणित दिवस'''' के तौर पर स्थापित करने का प्रयास किया गया है। साथ ही 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के तौर पर मनाया जाने लगा है।

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास अवध प्रांत के संयोजक प्रमिल द्विवेदी ने कहा कि मां, मातृभूमि, मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं है। प्रांत सहसंयोजक डॉ.कीर्ति विक्रम सिंह ने भी अपनी बात रखी। इस मौके पर कानपुर प्रांत अध्यक्ष प्रो. अवनीश कुमार, प्रो. कीर्ति नारायण, राजेश अग्रवाल, प्रो. शीला मिश्रा, प्रवीण द्विवेदी,प्रो हिमांशु सिंह, केबी पंत , प्रो.आरके. पांडेय, एके श्रीवास्तव, संजीव सिंह, डॉ नीता सक्सेना सहित प्रदेश भर से बड़ी संख्या में शिक्षाविद, वैज्ञानिक, प्रोफेसर, चिकित्सक, चिंतक, लेखक, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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