लखनऊ। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सोमवार को हुए डबलडेकर बस हादसे ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि दुर्घटना का शिकार हुई बस (एचआर 55 एएफ 1323) पर 67 चालान थे, फिर भी अफसरों की मेहरबानी से यह सड़क पर दौड़ती रही। यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो पांच यात्रियों को जान न गंवानी पड़ती।
वर्ष 2023 में लखनऊ में इस बस के दो चालान हुए थे। उस समय अनफिट पाए जाने पर बस की आरसी निरस्त करने और इसे सीज करने की संस्तुति हुई थी। नियमानुसार, हरियाणा में पंजीकृत इस बस को ब्लैकलिस्ट करने के लिए संबंधित आरटीओ को रिपोर्ट भेजी जानी थी। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट तैयार तो हुई, लेकिन डग्गामार सिंडिकेट के दबाव में उसे कभी भेजा ही नहीं गया।
16 की जगह ठूंस दीं 43 स्लीपर सीटें
हादसे के बाद हुई तकनीकी जांच में चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। बस की मूल बनावट के साथ अवैध छेड़छाड़ की गई थी। बस में मात्र 16 स्लीपर सीटों की अनुमति थी, जिसे बढ़ाकर 43 स्लीपर सीटें कर दिया गया। अतिरिक्त सीटें लगाने के चक्कर में इमरजेंसी एग्जिट को भी बाधित कर दिया गया था। इसके बाद भी बस को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया।
सोमवार को हुआ था हादसा।- फोटो : File photo
सोमवार को हुआ था हादसा।- फोटो : File photo
सोमवार को हुआ था हादसा।- फोटो : File photo
सोमवार को हुआ था हादसा।- फोटो : File photo
सोमवार को हुआ था हादसा।- फोटो : File photo
सोमवार को हुआ था हादसा।- फोटो : File photo