विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी)-2021 में सेंध ने प्रदेश सरकार की टेंशन बढ़ा दी है। टीईटी निरस्त होने से चुनाव से पहले विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। हालांकि, पेपर लीक की सूचना के बाद आनन-फानन में परीक्षा निरस्त करने का फैसला कर सरकार ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश जरूर की, लेकिन इसे लेकर परीक्षा में बैठने वाले 20 लाख से अधिक युवाओं की नाराजगी सत्तारूढ़ दल के लिए चिंता का सबब जरूर बन गई है।
यह पहला मौका नहीं है जब नकल माफिया ने परीक्षा में सेंध लगाई है। इस बार टीईटी के लिए सरकार की ओर से पुख्ता इंतजाम भी किए गए थे। किसी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए एसटीएफ की सभी यूनिटों को निगरानी के लगाया गया था। बावजूद इसके माफिया पेपर लीक कराने में कामयाब हो गए।
परीक्षा निरस्त होने की घोषणा के साथ ही विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोल दिया तो सरकार भी बचाव के लिए आगे आ गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर-देवरिया के दौरे पर थे। उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी गई। परीक्षा निरस्त होने के तकरीबन एक घंटे बाद ही प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा व एडीजी कानून-व्यवस्था ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर सारी स्थिति सामने रखी। मुख्यमंत्री ने देवरिया में आरोपियों पर गैंगस्टर व रासुका के तहत कार्रवाई तथा उनकी संपत्ति जब्त करने का एलान कर दिया।
जिस तरह से विपक्ष इस मामले पर सरकार पर हमलावर है उसे देखते हुए प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा व एडीजी कानून-व्यवस्था ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अगले महीने दोबारा परीक्षा कराने का एलान भी किया।
चुनाव नजदीक हैं इसलिए विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों ही अपने-अपने नजरिये से टीईटी पेपर लीक मामले के सियासी नफा-नुकसान का आकलन कर रहे हैं। विपक्ष को सरकार को घेरने का बड़ा मुद्दा मिला है जिसे वह हाथ से जाने नहीं देना चाहता है। विपक्षी दल इस मुद्दे को हवा देकर परीक्षा निरस्त होने से नाराज युवाओं को चुनाव में अपने साथ लामबंद करने की कोशिश में दिख रहे हैं तो सरकार आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई और जल्द फिर से परीक्षा कराकर उनके साथ खड़े होने का संदेश देने की कोशिश में है। अब देखने वाली बात यह होगी कि विपक्ष अब इस मुद्दे पर किस तरह सरकार की घेरेबंदी करता है जिससे उसे चुनाव में सियासी फायदा मिल सके।