निरीक्षण करते कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद।
बख्शी का तालाब। तालाब के प्रदूषित पानी से मरीं मछलियों को गोमती में फेंका गया था। विभागीय जांच में यह बात सामने आई है। मामले के संबंध में अमर उजाला में प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेकर मत्स्य विभाग के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने मंगलवार को घटनास्थल का निरीक्षण किया।
उन्होंने बताया कि जांच में सामने आया है कि अकड़रियां गांव स्थित पट्टे के पोखर में पालीं मछलियों के मरने पर किसान रुपन की बेटी शिवानी उन्हें नदी में डाल आई थी। उन्होंने विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देशित किया कि प्रदेश में सभी पट्टाधारक मत्स्य पालकों को छह महीने में एक बार प्रशिक्षण जरूर दिया जाए। साथ ही विभागीय हैचरियों से मछली बीज न लेकर बाहर से लेने वालों पर सख्ती की जाए।
गौरतलब है कि इटौंजा के हीरापुरवा गांव के पास गोमती में मरी मछलियों के उतराने का वीडियो सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। पुलिस और मत्स्य विभाग की टीम ने विभागीय मंत्री के निरीक्षण के पहले मछलियों को नदी से निकलवाकर पास ही गड्ढे में दबवा दिया। विभागीय मंत्री मौके पर पहुंचे तो उस समय भी कुत्ते गड्ढे में दबाईं मछलियों को खोदकर खाते देखे गए।
प्रदूषण कंट्रोल टीम ने लिया सैंपल
विभाग की टीम ने गोमती, अकड़रिया तालाब से पानी का सैंपल लिया है। मौके पर मौजूद एडीएम सिटी ने ककरहा बाबा शिव मंदिर परिसर में नूडल फैक्ट्री की ओर से बहाए जा रहे प्रदूषित पानी का भी नमूना लेने का निर्देश टीम को दिया।
फ्लोर मिल के प्रदूषित पानी से मरीं मछलियां
महिंगवा के मोहम्मदपुर निवासी बिट्टो ने मंत्री से शिकायत की है कि राम निवास फ्लोर मिल के प्रदूषित पानी से आठ मार्च को उनके तालाब में पाली गईं मछलियां मर गईं थीं। तहसील समाधान दिवस में भी शिकायत की, पर कार्रवाई नहीं हुई। मंत्री ने एसडीएम को निर्देशित किया कि पीड़िता को मुआवजा दिया जाए और प्रदूषण फैलाने वाली मिल पर कार्रवाई की जाए।
निरीक्षण करते कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद।