लखनऊ। जिस बिल्डिंग के मामले में एलडीए के जेई दिनेश शर्मा और सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश साढ़े सात लाख रुपये घूस लेते पकड़े गए थे, उसका मानचित्र एलडीए से पास नहीं है। बिना मानचित्र पास कराए ही इंजीनियरों मिलीभगत से बन रही थी। यही वजह कि 30 से अधिक दुकानें बन जाने के बाद भी एलडीए ने नोटिस तक नहीं काटा था।
इंजीनियरों के पकड़े जाने के बाद जब मामले की पड़ताल की गई तो सामने आया कि बिल्डिंग पूरी तरह अवैध है। एलडीए के इंजीनियर उगाही के लिए जोड़-तोड़ में लगे थे, मगर बात बन नहीं पा रही रही थी। इस पर बिचौलिए को भी इस काम में लगाया गया था। जेई जितनी रकम मांग रहे था, निर्माण करने वाला उतना देने के लिए तैयार नहीं था, तो आईजीआरएस पर शिकायत कराई गई, जिसके बाद मामला 15 लाख पर तय हुआ था।
कंप्यूटर ऑपरेटर तक शामिल
एक जानकार ने बताया कि कई कम्प्यूटर ऑरेटर भी रिश्वत में हिस्सा लेते हैं। नोटिस की टाइपिंग से लेकर आदेश टाइपिंग तक तक हर स्तर पर 20 से 50 हजार रुपये लिए जाते हैं। कुछ जगहों पर तो यह सीधे अवैध निर्माण करने वाले से सेटिंग भी करते हैं।
जेई निलंबित
जेई दिनेश वर्मा को निलंबित कर दिया गया है। एलडीए वीसी ने शनिवार को ही रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। अब शासन ने एलडीए वीसी की रिपोर्ट के आधार पर जेई को निलंबित कर दिया है और कानपुर मंडल के अपर आयुक्त को जांच अधिकारी बनाया है। सुपरवाइजर को एलडीए वीसी ने शनिवार को ही निलंबित कर दिया था।
Iजिस बिल्डिंग के मामले में जेई और सुपरवाइजर को विजिलेंस ने पकड़ा था, उसका मानचित्र एलडीए से पास नहीं है। इस बारे में और रिपोर्ट अधिकारियों से मांगी गई है। जो कर्मचारी अनियमितता में लिप्त हैं, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। I
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प्रथमेश कुमार, वीसी एलडीएI
बिना नक्शा पास कराए अवैध तरीके से हो रहा था इन इमारतों का निर्माण।
बिना नक्शा पास कराए अवैध तरीके से हो रहा था इन इमारतों का निर्माण।
बिना नक्शा पास कराए अवैध तरीके से हो रहा था इन इमारतों का निर्माण।