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शहीद जवान के साथियों ने पूरा किया वचन, निभाया भाई का फर्ज

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रायबरेली में शहीद जवान शैलेंद्र प्रताप सिंह की बहन ज्योति की शादी में शामिल होते साथी सीआरपीएफ ज? - फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। देश की खातिर सीआरपीएफ जवान शैलेंद्र प्रताप सिंह शहीद हो गए। वह अपनी छोटी बहन ज्योति की शादी में शामिल होने का वचन नहीं निभा पाए। साथियों ने सोमवार को शहीद जवान की बहन की शादी में शामिल होकर न सिर्फ भाई का फर्ज निभाया, बल्कि भाई की सारी रस्में भी निभाईं। सीआरपीएफ जवानों के पहुंचने से परिवारीजनों का उत्साह भी बढ़ा और उन्हें अपने बेटे की कमी नहीं खली। जवान शहीद के माता-पिता से मिले और बहन को विदा किया। सीआरपीएफ जवानों के इस तरह कार्यक्रम में पहुंचकर एक भाई का फर्ज निभाने पर हर कोई उनका कायल हो गया।
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डलमऊ तहसील क्षेत्र के मीरमीरानपुर गांव निवासी शैलेंद्र प्रताप सिंह सीआरपीएफ जवान थे और पांच अक्तूबर 2020 को जम्मू-कश्मीर में हुई आतंकी घटना में शहीद हो गए थे। शहीद का परिवार रायबरेली शहर के मलिकमऊ कॉलोनी में रहता है। शहीद शैलेंद्र सिंह ने बहन ज्योति की शादी धूमधाम के साथ करने का वचन दिया था, लेकिन इसके पहले ही वह शहीद हो गए। सोमवार को शहीद की बहन की बरात आनी थी। इस बात की जानकारी शहीद के साथी सीआरपीएफ जवानों को हुई तो वह यहां पहुंच गए।
सीआरपीएफ के 10 जवान शहीद की बहन की शादी में शामिल हुए और भाई की सारी रस्में निभाईं। शहीद जवान के पिता नरेंद्र बहादुर सिंह कहते हैं कि बेटे के साथी जवानों ने आकर बहन का फर्ज निभाया। उन्होंने बेटे की कमी को पूरा किया। पिता ने बताया कि उनकी बेटी ज्योति महराजगंज जिले में शिक्षिका के पद पर तैनात है, जबकि उनका दामाद अजय सिंह चौहान जिले में ही शिक्षक पद पर तैनात है। दामाद शहर के तिलक नगर में परिवारीजनों के साथ रहता है।
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जवानों को दिया था निमंत्रण
शहीद शैलेंद्र के पिता नरेंद्र बहादुर सिंह कहते हैं कि अधिकतर सीआरपीएफ जवान जिले के ही रहने वाले हैं। सभी शहीद बेटे शैलेंद्र के साथी थे। उनका घर भी आना-जाना था। कुछ जवानों को बेटी की शादी का निमंत्रण कार्ड भेजा था। वहीं सीआरपीएफ जवानों ने व्हाट्सएप पर एक ग्रुप भी बना रखा है। कुछ जवान तो निमंत्रण देने पर तो कुछ जवान ग्रुप में बेटी की शादी की सूचना मिलने के चलते शादी में पहुंचकर भाई का फर्ज निभाया। नरेंद्र कहते हैं कि जवानों के शामिल होने से उन्हें बेटे की कमी नहीं खली। बेटी को भी भाइयों का प्यार मिल गया।
बेटी ज्योति को जिले में मिले तैनाती
शहीद की मां शिया दुलारी कहती हैं कि बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। हम लोग बुजुर्ग हो गए हैं। हम लोगों की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। बेटी ज्योति की तैनाती महराजगंज जिले में है। कई बार अधिकारियों से पत्र लिखकर मांग कर चुके हैैं कि बेटी की तैनाती यदि रायबरेली जिले में कर दी जाए तो कम से कम वह हमारी लोगों की देखभाल कर सके। बावजूद इसके अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। कहती हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने के लिए भी लखनऊ गई थी, लेकिन वहां उनसे नहीं मिलने दिया गया। उनकी यह व्यथा सुनने वाला कोई नहीं है।
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