पुलिस ने आदित्य की कार तो छोड़ दी लेकिन अखंड की कार थाने में ही खड़ी करा ली। अखंड का कहना है कि उसकी कार पिता राजेंद्र कुमार सिंह के नाम पर है। कार में जीपीएस सिस्टम लगा हुआ है। बृहस्पतिवार सुबह उसने मोबाइल फोन पर कार का जीपीएस ट्रैकर ऑन किया तो चकरा गया। उसकी कार लखीमपुर में नजर आ रही थी। उसका कहना है कि उसे लगा कार थाने से चोरी हो गई है, इसलिए तुरंत इंजन लॉक कर दिया।
इससे पहले वह पुलिस को फोन करता, पुलिस अधिकारियों ने खुद उससे संपर्क किया और कार को सरकारी काम के सिलसिले में लखीमपुर भेजने की जानकारी दी। अधिकारियों ने उससे कार का इंजन अनलॉक करने को कहा। अधिकारियों के आग्रह पर अखंड ने कार को अनलॉक किया। शाम को यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पुलिस आयुक्त सुजीत पांडेय को गोमतीनगर पुलिस की इस कारस्तानी का पता चला तो वह भड़क उठे और इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर कर दिया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पुलिस टीम यहां अलकनंदा अपार्टमेंट में बीटेक छात्र प्रशांत सिंह की हत्या के मामले में लखीमपुर जेल में बंद मुख्य आरोपी अर्पण शुक्ला उर्फ टाइगर व एक अन्य युवक के बयान लेने गई थी। टीम बुधवार रात ही लखीमपुर के लिए रवाना हो गई थी।
इंस्पेक्टर ने लिखकर दिया ‘बेगार’ में गई है कार
गोमतीनगर पुलिस ने एसयूवी को ‘बेगार’ में इस्तेमाल करने की बात लिखकर दी है। थाना की मुहर लगे कागज पर तीन लाइन में लिखा है कि एसयूवी बेगार में जनपद लखीमपुर बुधवार शाम से गई है, जो वापस आ रही है। इस दौरान कोई घटना घटित होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी थाने की होगी।