फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तालाबों पर खड़े हो गए भवन, कहां जाए शहर का पानी

विज्ञापन
30जीडीएपी18-गोंडा में इमामबाडा के निकट गुरु तालाब - फोटो : GONDA
विज्ञापन
गोंडा। तालाबों का शहर कहे जाने वाले अपने गोंडा की सांसे अब फूल रही हैं। हालत यह है कि बीते 20 सालों से तालाबों पर भवन खड़े होते रहे और अब शहर का पानी लोगों के घरों में घुस रहा है तो दरवाजे पर कदम रोक रहा है। 20 से 22 तालाबों का दावा शहर के पुराने लोग करते हैं लेकिन नपाप तो 8 से 10 तालाब ही अभी मान रहा है। उन तालाबों पर कब्जे रोकने के बजाए लोगों को उपकृत करने में लगा है। प्रशासन भी जल संरक्षण के दावे तो कर रहा है लेकिन, शहरी तालाबों की दुर्दशा और उन पर हुए कब्जों पर खामोशी साधे है। मौजूदा समय में शहर के दो दर्जन मोहल्ले ऐसे हैं जो जलमग्न जैसी स्थिति में ही रहते हैं, लोग एक दूसरे को दोष देते हुए दिन तो काट रहे हैं पर कोई मुखर नही हो रहा है। तालाबों पर कब्जे करके भवन बनाने वालों ने मामलों को दांवपेंच में उलझा रखा है।
विज्ञापन

बात गोंडा शहर की हो तो सड़कों और जल भराव से घिन सी लगने लगती है। मुख्य सड़कों की दशा तो सुधरी है लेकिन शहर के मोहल्लों की सड़के जस की तस हैं। ऊपर से शहर के पानी जाने वाले स्थानों पर लोगों का कब्जा और रुला रहा है। तालाबों को एक-एक करके या तो पाट दिया गया और प्लाटिंग करके भवन बना दिए गए या फिर उन्हें घेर दिया गया। तालाबों के अस्तित्व को चुनौती ऐसी दी गई कि अब शहर की सांस ही फूलने लगी है। शहर के दो लाख के करीब बाश्ंिादे आज भी तालाबों की दुर्दशा से दुखी हैं लेकिन वहां आबादी हो जाने से कुछ कह नहीं पा रहे हैं। जलनिकासी की समस्या पर व्यापारी नेता आदित्य पाल कहते हैं कि सीवर लाइन बनने से ही समस्या हल होगी। अनिल मित्तल ने कहा कि कार्य योजना तैयार कर प्रशासन व्यवस्था करे।
शुरू हुआ कब्जे का दौर तो बढ़ता गया कारवां
शहर में बड़े तालाबों और उनका सीध जुड़ाव शहरी जलनिकासी से था, जिसमें आईटीआई चौराहे पर स्थित विपदा तालाब था। अब यहां तालाब बड़ों के कब्जों में है। यह तालाब मेवातियान होते हुए कटहाघाट तक जाता है। लेकिन अब आप इसे देख नहीं सकते। ऐसे ही बहराइच रोड़ पर स्थित मवैइया तालाब की स्थिति यह अब वहां भवन ही नजर आ रहे हैं। दुखहरण नाथ मंदिर से कुष्ठ सेवा केंद्र फैले इस तालाब पर कब्जा है। इमामबाड़ा के पास स्थित गुरू तालाब पर भी कब्जा हो चुका है और अभी हो रहा है। उतरौला रोड़ पर स्थिति परसादी तालाब पर अवैध कब्जा है। आईटीआई से कचहरी रोड पर एलबीएस के विज्ञान संकाय गेट के बगल स्थित तालाब पर भी अब भवन खड़े हो गए हैं। राजा मोहल्ले का एक तालाब गुम ही हो चुका है। पटेल नगर के पांडे तालाब भी आखिरी सांसे गिन रहा है। कब्जा होता जा रहा है।
विज्ञापन

अवैध कब्जे की मुहिम में नाले और तालाब रहे अछूते
शहर में अवैध कब्जे के विरुद्ध अभियान तो चले और बड़ी कार्रवाईयां भी हुईं। लेकिन तालाबों और नालों पर हुए कब्जे छूटे रहे। लगातार कब्जे होते जा रहे हैं, प्रशासन मौन बना है। सरकारी संपत्तियों पर भी कब्जे हो रहे हैं, हाल यह है कि नाले पट जाने से बारिश की हल्की छींटे भी रास्तों पर जलभराव कर दे रही हैं। प्रशासन की ओर से चेतावनी दी गई है लेकिन कब्जे नही हट रहे हैं।
पैमाइश कराकर होगी कार्रवाई
शहर में अवैध कब्जों को चिह्नित करने के लिए टीम बनी है। कार्रवाई हो रही है, तालाबों से अवैध कब्जे हटाने के लिए पैमाइश कराकर कार्रवाई की जाएगी। कब्जों को रोकने के लिए नपाप को भी निर्देश दिए गए हैं। - राकेश कुमार सिंह, नगर मजिस्ट्रेट
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें