लखनऊ। शहर के प्रसिद्ध हनुमान सेतु के पास हर साल की तरह इस बार भी पारंपरिक कतकी मेला लगा, लेकिन मेले की रौनक से ज्यादा इस बार चर्चा उसकी अव्यवस्थाओं की अधिक हो रही है। सस्ते दामों पर सामान और हस्तशिल्प की विविधता के बावजूद मेले में बुनियादी सुविधाओं की कमी ने स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों को निराश किया है। अमर उजाला से बातचीत में दुकानदारों और मेला घूमने आए शहरवासियों ने अपनी परेशानी साझा की।
शौचालय का अभाव सबसे बड़ी चुनौती
लखनऊ विवि की छात्राएं संस्कृति जायसवाल और वसुंधरा ने कहा कि यहां विभिन्न वस्तुएं बेहद सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं, लेकिन महिलाओं के लिए शौचालय न होना बड़ी समस्या है। वहीं, पास ही स्थित चित्रगुप्त मंदिर के पुजारी आचार्य कृष्णानंद पांडे ने बताया कि मेला क्षेत्र में शौचालय न होने से कई लोग मंदिर में घुस आते हैं, जिससे मंदिर परिसर में भी गंदगी फैल रही है।
दुकानदार भी परेशान, न पानी न सफाई
खुर्जा से चीनी मिट्टी के बर्तन बेंचने आए कुछ दुकानदारों ने बताया कि वह दूरदराज से दुकान लगाने आए हैं। इसके लिए शुल्क भी जमा किया है, लेकिन यहां पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्हें पानी खरीदना पड़ता है। शौचालय न होने से हालात और भी मुश्किल हो जाती है।
डस्टबिन की कमी और प्लास्टिक का ढेर
मेला क्षेत्र में चारों ओर प्लास्टिक की थैलियां और कचरे का ढेर लगा है। कचरे से गोमती नदी भी प्रदूषित हो रही है। दुकानदारों का कहना है कि नगर निगम ने डस्टबिन नहीं रखे हैं। हवा से कचरा इधर-उधर फैल रहा है। दुकानदार समीर ने बताया कि हम सफाईकर्मी को अलग से पैसे देने को तैयार हैं, फिर भी कचरा उठाने कोई नहीं आता।