लखनऊ। समाज सुधारक, विद्वान और लेखक ज्ञानी दित्त सिंह की जयंती पर आलमबाग स्थित गुरु तेगबहादुर भवन चंदरनगर में मंगलवार को आजाद लेखक कवि सभा की ओर से आयोजन किया गया। सरदार नरेंद्र सिंह मोंगा की अध्यक्षता में बीबी रूही वडेरा और हरलीन कौर वडेरा ने कीर्तन से प्रभु का सुमिरन किया। सरबजीत सिंह बखि्शश ने कार्यक्रम का संचालन किया। आजाद लेखक कवि सभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह मोंगा ने कहा कि ज्ञानी दित्त सिंह विद्वान थे जिन्हें तर्कसंगत दलीलों का बादशाह कहा जाता है। उन्होंने खालसा कॉलेज अमृतसर की स्थापना की थी। इस अवसर पर त्रिलोक सिंह बहल, एस. निर्मल सिंह, बीबी रवनेत कौर, जसबीर कौर, शरणजीत कौर, एस. दविंदर पाल सिंह बग्गा, अजीत सिंह, हरपाल सिंह गुलाटी ने भी ज्ञानी दित्त सिंह के कृतित्व के बारे में बताया।
ज्ञानी दित्त सिंह का जन्म 21 अप्रैल 1850 को पाकिस्तान के लाहौर के गांव बस्सी पठाना में हुआ था। वे सिख धर्म के विद्वानों में से एक थे जिन्होंने 70 से अधिक किताबें लिखीं। वे एक इतिहासकार, लेखक और संपादक के साथ ही सिंह सभा के प्रख्यात सुधारकों में से एक थे। उनकी रचनाएं साधु दयानंद ते मेरा संवाद और दुर्गा परबोध सिख दर्शन के प्रमुख ग्रंथ माने जाते हैं। 6 सितंबर 1901 में लाहौर में उनका निधन हुआ था।