लखनऊ। एमबीबीएस में दाखिले के नाम पर 100 करोड़ रुपये की ठगी करने वाला आरोपी प्रेम प्रकाश विद्यार्थी बिहार जेल में बंद रहते हुए भी अपना नेटवर्क चलाता था। इस काम में उसकी मदद गिरफ्तार आरोपी संतोष कुमार ने की थी। साइबर क्राइम थाने की पुलिस अब दोनों आरोपियों के अन्य सहयोगियों के बारे में पता लगा रही है।
इंस्पेक्टर साइबर क्राइम थाना बृजेश यादव ने बताया कि धोखाधड़ी के मामले में आरोपी को सबसे पहले बिहार पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जांच व पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी प्रेम प्रकाश जेल में रहते हुए ठगी का धंधा चलाता था। कुछ वर्ष पहले प्रेम प्रकाश की जेल में ही बंद संतोष कुमार से मुलाकात हुई थी। दोनों की दोस्ती हुई। प्रेम प्रकाश ने संतोष को जेल में ही रहते हुए अपने गैंग में शामिल किया। इसके बाद उसकी जमानत कराई।
संतोष के जेल से बाहर आने के बाद आरोपी प्रेम प्रकाश उसकी मदद से जेल में रहते हुए अपना नेटवर्क चलाने लगा। बिहार से सहारनपुर पेशी पर जाते हुए आरोपी प्रेम प्रकाश पुलिस अभिरक्षा से भाग निकला था।
अभिरक्षा से भागने की साजिश प्रेम प्रकाश ने बहुत पहले ही रच ली थी। साजिश के तहत वह दिल्ली पहुंचा और एक होटल में ठहरा। अभिरक्षा में तैनात पांच पुलिस वालों को चकमा देकर वहां से भाग निकला और फिर लखनऊ आकर स्टडी पाथवे नाम की कंसल्टेंसी खोली।
कंसल्टेंसी में 50 लोगों का स्टाफ करता था काम
आरोपी ने बताया कि मथुरा के जीएलए विवि से बीटेक करने के बाद उसने सबसे पहले गोरखपुर में कोचिंग खोली थी। कोचिंग की आड़ में वह दाखिले के नाम पर ठगी करने लगा। इसके बाद बिहार में उसने काम शुरू किया। लखनऊ स्थित कंसल्टेंसी में आरोपी प्रेम प्रकाश ने करीब 50 लोगों का स्टाफ भर्ती किया था। स्टाफ में तैनात लोगों का काम बंटा हुआ था। कुछ को सिर्फ छात्रों व उनके अभिभावकों को कॉल करने की जिम्मेदारी मिली थी। कुछ जाल में फंसे छात्र व उनके अभिभावकों से मुलाकात कर बातचीत करते थे। सारी बात फाइनल होने के बाद आरोपी प्रेम प्रकाश ग्राहक से आखिरी मुलाकात करता था।
तीन तरीके से रुपये लेता था आरोपी
पूछताछ में प्रेम प्रकाश और संतोष ने बताया कि वे लोग पीड़ित से तीन अलग-अलग तरीके से रुपये ऐंठते थे। कुछ रुपये वे लोग हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस नाम से खोले हुए फर्जी खाते में डीडी के माध्यम से लेते थे। कुछ रुपये ऑनलाइन और बचे हुए रुपये नकद लेते थे। पीड़ित के पास सिर्फ डीडी व ऑनलाइन भुगतान का सबूत होता था। कैश की कोई लिखा पढ़ी नहीं होती थी।
फंसने पर कुछ रुपये लौटाकर मामला रफा-दफा कर देता था : इंस्पेक्टर साइबर क्राइम थाना ने बताया कि जालसाज प्रेम प्रकाश बेहद ही शातिर है। कोई पीड़ित जब शिकायत करता था या एफआईआर दर्ज कराता था तो आरोपी समझौते के नाम पर सिर्फ डीडी व ऑनलाइन दिए गए रुपये के सेटलमेंट की बात करता था। पीड़ित के राजी होने पर वह सेटलमेंट के तहत तय रकम लौटा देता था। कैश में दिए गए रुपये वह हड़प लेता था।
दिल्ली में खोलने वाला था दफ्तर : जालसाज प्रेम प्रकाश दिसंबर में दिल्ली में अपनी कंसल्टेंसी का दफ्तर खोलने की तैयारी में था। इंस्पेक्टर बृजेश यादव ने बताया कि आरोपी अब एमडी व एमएस में दाखिला कराने का जाल फैला रहा था। पुलिस आरोपी प्रेम प्रकाश से जेल में मिलने वाले मुलाकातियों का ब्योरा भी खंगालेगी। इसके लिए पुलिस जल्द जेल प्रशासन से संपर्क करेगी। पुलिस को गैंग से जुड़े कुछ अन्य के नाम भी पता चले हैं। उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है।
विदेश में करता था मीटिंग : अभिरक्षा से भागने के बाद जालसाज प्रेम प्रकाश ने कई देशों की यात्रा भी की थी। ऐसा बताया जाता है कि वह अपने सहयोगी संतोष व कुछ अन्य लोगों को वहां बुलाकर मीटिंग करता था। इंस्पेक्टर के मुताबिक प्रेम प्रकाश की ठगी का शिकार हुए लोगों की संख्या एक हजार से ज्यादा की है। यह जानकारी इसके पास से बरामद मोबाइल और कुछ अन्य दस्तावेजों से हुई है।