''घर का न घाट का'' के मंचन ने गुदगुदाया
लखनऊ। गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के सभागार में बृहस्पतिवार को नाट्य निर्देशिका अचला बोस की नाट्य कृति ''घर का न घाट का'' का मंचन हुआ। पारिवारिक कहानी के बीच दर्शकों ने नाटक का लुत्फ उठाया। मंचन से पहले न्यायमूर्ति मनीष कुमार ने कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। नाटक की कथा वस्तु के अनुसार सामाजिक परंपरा है वंश परंपरा। लोगों को अक्सर यह कहते सुना गया है कि घर का एक चिराग होना चाहिए, जो वंश को जीवित रखे ओर खानदान को आगे बढ़ाए। इसी ताने-बाने के चक्कर में नाटक के नायक अमन को उसकी पत्नी रमा दूसरा विवाह करने के लिए लिखित सहमति देती है।
''घर का न घाट का'' के मंचन ने गुदगुदाया
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