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टीईटी आवेदन में मुसीबत बना सर्वर, अंतिम तारीख बढ़ाने पर विचार

Mon, 01 Oct 2018 10:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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tet - फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) के ऑनलाइन आवेदन में आई बाधा आठ दिन बीतने के बाद भी नहीं दूर हो सकी। आवेदन न कर पाने से परेशान अभ्यर्थियों ने सोमवार को सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर वेबसाइट की गड़बड़ी दूर करने की मांग की। 

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धरना-प्रदर्शन एवं हंगामे के बीच सचिव परीक्षा नियामक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने आश्वासन दिया कि उनकी ओर से आवेदन की तिथि एक सप्ताह आगे बढ़ाए जाने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। सचिव के आश्वासन के बाद भी अभ्यर्थी अंतिम तिथि 15 दिन आगे बढ़ाने की मांग पर अड़े रहे।

अभ्यर्थियों का तर्क था कि यूपीटीईटी में कम से 10 से 12 लाख आवेदन आने की संभावना है। अभी लगभग दो लाख अभ्यर्थियों ने ही पंजीकरण किया है, ऐसे में अभी 90 फीसदी आवेदन किया जाना शेष है।
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टीईटी आवेदन नहीं कर पाने से परेशान प्रदेश भर के अभ्यर्थी सोमवार को पूर्व तय कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा नियामक कार्यालय पहुंचे। अभ्यर्थी वेबसाइट की गड़बड़ी दूर करने केलिए सचिव से आश्वासन चाह रहे थे।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि दो दिन में परेशानी दूर नहीं हुई तो चार अक्तूबर को दोबारा प्रदर्शन किया जाएगा। उधर, बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रभात कुमार ने कहा कि मंगलवार को स्थिति का जायजा लेने और अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने पर निर्णय किया जाएगा।

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सर्वर की गड़बड़ी दूर करने में जुटे एनआईसी के इंजीनियर

सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने कहा कि एनआईसी की ओर से तकनीकी गड़बड़ी दूर नहीं किए जाने से समस्याएं आ रही हैं। एनआईसी के अधिकारी वेबसाइट की तकनीकी खामियों को दूर करने में लगे हैं। चतुर्वेदी ने बताया कि एनआईसी की ओर से उन्हें बताया गया है कि मंगलवार तक गड़बड़ी दूर हो जाएगी। इसकी जानकारी राज्य सरकार को दे दी गई है। 
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एनआईसी ने कहा, समस्या के लिए यूपीडेस्को जिम्मेदार 

उधर, एनआईसी के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक आईपी सिंह ने कहा कि टीईटी 2018 के ऑनलाइन आवेदन की वेबसाइट की खराबी से एनआईसी का कोई संबंध नहीं है। एनआईसी ने सिर्फ ऑनलाइन आवेदन के लिए सॉफ्टवेयर तैयार कर दिया है। उन्होंने कहा कि टीईटी ऑनलाइन आवेदन का कार्य उत्तर प्रदेश स्टेट डाटा सेंटर कर रहा है, जो यूपी सरकार के यूपीडेस्को के अधीन संचालित है। ऐसे में सर्वर की खराबी के लिए यूपीडेस्को जिम्मेदार है। 
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