छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना से करीब 10 लाख छात्र बाहर कर दिए गए हैं। राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र (एनआईसी) की जांच में भारी गड़बड़ियां पकड़ में आने पर यह फैसला किया गया। चूंकि, स्क्रूटनी अभी जारी है, इसलिए अपात्र ठहराए जाने वाले छात्रों की संख्या और भी बढ़ने की उम्मीद है।
दशमोत्तर छात्रवृत्त्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में इस सत्र में 39 लाख 41 हजार 597 छात्रों के आवेदन जिलों से अग्रसारित किए गए थे।
शासन ने आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र और विभिन्न कक्षाओं के रिजल्ट समेत कुल 31 बिंदुओं के आधार पर इन आवेदनों की जांच कराई थी। सोमवार को एनआईसी ने शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
इसके तहत हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 3.5 लाख छात्र और उससे ऊपर की कक्षाओं में 26 लाख छात्रों के आवेदन ही सही पाए गए। मतलब, 9 लाख 91 हजार 597 आवेदनों को ‘संदिग्ध डाटा’ की श्रेणी में रखा गया है।