हलोर क्षेत्र में पीली पड़तीं गेहूं की बालियां। -संवाद
रायबरेली। मौसम में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। तापमान औसत से अधिक होने से खेतीबाड़ी पर असर पड़ रहा है। हाल यह है कि खेतों में नमी कम होने से किसानों को सिंचाई का प्रबंध करना पड़ रहा है। तापमान 31 डिग्री तक पहुंच गया है। गेहूं की फसल प्रभावित हो रही है। इसी कारण किसानों के माथे पर पसीना आ रहा है।
जनवरी में केवल 17 दिन तापमान औसत से कम रहा और उसके बाद से लगातार बढ़त बनी रही। इसका असर भी दिख रहा है। खेतों की नमी खत्म हो गई, किसान खेतों की सिंचाई कर रहे हैं जिससे फसल की लागत बढ़ गई है। फरवरी में जब खेतों को कोहरा के साथ सर्दी की जरूरत थी तो कोहरा नहीं पड़ा और तापमान बढ़ता चला गया।
फरवरी के पहले सप्ताह में ही तापमान 25 डिग्री के पार पहुंच गया। इसके बाद लगातार बढ़त और गिरावट दर्ज होती रही। एक स्थिर तापमान न होने से गेहूं और सरसों की फसल पर प्रभाव पड़ा। गेहूं की बालियां घनी नहीं हो सकीं और यही किसानों की चिंता की वजह है।
बढ़ते तापमान ने किसानों को हैरान कर दिया है। किसानों के मुताबिक मार्च के पहले सप्ताह से गर्मी तेज होने लगेगी और फसल जल्द पकने लगेगी जिसका सीधा असर पैदावार पर पड़ेगा।
शुक्रवार सुबह कुछ घंटे बदली रही और उसके बाद मौसम साफ हो गया। दोपहर में तेज धूप रही। हाल यह रहा कि धूप में खड़ा होना मुश्किल रहा। अधिकतम तापमान 31 डिग्री रहा तो न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस रहा।
इंदिरा गांधी उड़ान अकादमी फुरसतगंज के मौसम विशेषज्ञ दीतेंद्र सिंह ने बताया कि हवा की दिशा बदलने से हल्की बारिश की संभावना बनी है। तापमान 30 डिग्री के ऊपर है और आने वाले दिनों में हल्की बारिश की संभावना है।
गेहूं की पैदावार होगी कम
किसान हरिश्चंद्र, संजय सिंह, राजू कुमार व नरेंद्र कुमार ने बताया कि इस वर्ष गेहूं की फसल के लिए मौसम सही नहीं रहा। फरवरी में तापमान औसत से अधिक रहा जिससे गेहूं का दाना पतला हो गया है। यदि बारिश हुई तो फसल पर बहुत अधिक असर पड़ेगा। गेहूं की पैदावार कम होने की आशंका है।