कानपुर के बाद रफ्तार पकड़ेगी ‘तेजस’
शुरुआत में शताब्दी की रफ्तार पर ही चल सकेगी तेजस एक्सप्रेस, कर्व व कॉशन से रफ्तार पर लगेगी लगाम
देश की पहली प्राइवेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस कानपुर पार करने के बाद रफ्तार पकड़ सकेगी। लखनऊ से कानपुर रूट पर ट्रेन की गति कम रहेगी। हालांकि, ट्रेन की स्पीड शताब्दी एक्सप्रेस की औसत स्पीड से अधिक होने की उम्मीद है।
लखनऊ जंक्शन से आनंदविहार के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस देश की पहली ऐसी ट्रेन होगी, जिसका संचालन निजी हाथों में होगा।
ट्रेन के संचालन को लेकर आईआरसीटीसी व रेलवे बोर्ड अधिकारियों के बीच मंथन चल रहा है। चूंकि, ट्रेन सेमी हाईस्पीड है, इसलिए गति को लेकर खासी माथापच्ची हो रही है। ट्रेन की अधिकतम स्पीड 160 से दो सौ किलोमीटर प्रति घंटा तक है। पर, विशेषज्ञों की मानें तो लखनऊ से आनंदविहार के रूट पर ट्रेन कानपुर के बाद ही असल रफ्तार पकड़ सकेगी।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक लखनऊ से कानपुर के बीच 15 कॉशन हैं, जिसमें अधिकतम कर्व वाली जगहों पर हैं। इन जगहों पर शताब्दी के भी पहिए थम जाते हैं, लिहाजा ट्रेन को सुस्त रफ्तार से गुजारना होगा। दूसरे, लखनऊ से कानपुर रूट पर शताब्दी को भी करीब सौ किलोमीटर की रफ्तार से चलाया जाता है, जबकि इसके आगे लोको पायलट ट्रेन की रफ्तार को 125 किमी प्रति घंटे तक ले जाते हैं। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि शुरुआत में तेजस एक्सप्रेस भी शताब्दी की स्पीड पर ही दौड़ाई जा सकती है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि शताब्दी की पूरे रूट पर औसत गति जहां 78 किलोमीटर प्रति घंटा है, वहीं तेजस की एवरेज स्पीड इससे अधिक होगी, जिसकी वजह है ट्रेन के स्टॉपेज कम होना।
...तो इसलिए लगेगा कम समय
तेजस एक्सप्रेस लखनऊ से दिल्ली के बीच का सफर शताब्दी एक्सप्रेस से कम समय में सिर्फ इसलिए तय करेगी क्योंकि उसके स्टॉपेज कम हैं। मसलन, तेजस का स्टॉपेज सिर्फ कानपुर है। जबकि शताब्दी के स्टॉपेज कानपुर, इटावा, टुंडला, अलीगढ़, गाजियाबाद हैं। तेजस सुबह 6.50 बजे लखनऊ जंक्शन से चलकर कानपुर में रुकेगी और फिर उसका अगला स्टॉपेज आनंद विहार होगा।
यह हो तो बढे़ रफ्तार
विशेषज्ञों की मानें तो लखनऊ से दिल्ली के बीच ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए कई चरणों में काम करना होगा। हालांकि, इस ओर रेलवे प्रशासन द्वारा ट्रैक मेंटेनेंस करवाया जा रहा है। पर, रफ्तार बढ़े, इसके लिए ट्रैक का वेट अधिक होना चाहिए। दो स्लीपरों के बीच गैप कम हो, जिससे मजबूती आएगी। साथ ही ट्रैक पर जो गिट्टियां डाली जाती हैं, उनकी गहराई बढ़ाने केलिए इसके अतिरिक्त ब्रेकिंग डिस्टेंस भी बढ़ानी पड़ेगी।