ऐसे में उम्मीद है कि 25 दिसम्बर से पहले यह रूट खोल दिया जाएगा। हालांकि, शुरुआती दौर में पैसेंजर ट्रेनों को चलाया जाएगा। पर, सीतापुर से आगे के रूट का आमान परिवर्तन हो जाने के बाद ऐशबाग से सीधे दिल्ली को ट्रेनें चलाई जा सकेंगी।
इस रूट पर आमान परिवर्तन की जांच सीआरएस की ओर से की जा चुकी है। साथ ही 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलाने की अनुमति भी मिल गई है।
रेल मंत्रालय ने तीन ट्रेनें अंत्योदय, उदय व तेजस चलाने का दावा किया था। इसमें से अंत्योदय शुरू हो चुकी है, जबकि तेजस को लखनऊ से दिल्ली के बीच चलाने की तैयारी है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एसी बोगियों वाली यह ट्रेन करीब डेढ़ सौ किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी।
इसका टाइमटेबल भी तैयार हो चुका है। इसमें 23 बोगियां होंगी और इसे हफ्ते में छह दिन चलाने की तैयारी है। रेलवे नए साल से पहले इस ट्रेन का तोहफा देने की तैयारी कर रहा है। हालांकि अभी आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा नहीं की गई है।
देश की पहली स्वदेशी ट्रेन कही जाने वाली ट्रेन-18 का ट्रायल पूरा हो चुका है। इसे वाराणसी से दिल्ली के बीच दौड़ाने की योजना है। इसे लखनऊ से गुजारा जाएगा या नहीं, इस पर मंथन चल रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र से इसे गुजारा जाएगा।
इस ट्रेन की स्पीड 160 किमी प्रति घंटा होगी। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस ट्रेन में बिजली की खपत भी कम होगी। ट्रेन-18 के बाद रेलवे सेल्फ प्रोपेल्ड ट्रेन ट्रेन-20 दौड़ाएगा। इसके दो साल में पटरी पर आने की उम्मीद है, जिसकी स्पीड 180 किमी प्रति घंटा होगी।